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पलायन रोकने के लिए ठोस कदम उठाएं: राज्यपाल

Sun, 14 Oct 2018 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  अल्मोड़ा।
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अल्मोड़ा में चितई ग्वल देवता मंदिर के दर्शन करती राज्यपाल बेबी रानी मौर्य। - फोटो : अमर उजाला
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 राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र से पलायन और युवाओं में नशाखोरी की प्रवृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सर्किट हाउस में समीक्षा बैठक में राज्यपाल ने अधिकारियों को युवाओं के लिए पुनर्वास केंद्र बनाने, साधन विहीन और निर्बल वर्ग के बच्चों को हर संभव सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए। 
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 सर्किट हाउस में अधिकारियों की बैठक लेते हुए उन्होंने जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिकाधिक लोगों को मिले इसका विशेष ध्यान रखने को कहा। उज्जवला गैस योजना के तहत दूरस्थ ग्रामीणों की पात्र महिलाओं को अधिकाधिक लाभान्वित करने, प्रत्येक परिवार के शौचालय बनाने के लक्ष्य को पूर्ण करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी ली और लोगों को अधिकाधिक लाभ दिलाने को कहा। उन्होंने डीएम को नए पर्यटन स्थलों को विकसित करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय जनता से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनी।

राज्यपाल ने जन शिकायतों के निस्तारण में तेजी लाने, ग्रामीण अंचलों में योजनाओं का लाभ देने, स्वास्थ्य शिक्षा, सड़क व पेंशन से जुड़े मामलों में पूर्ण सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। सर्व प्रतिभा लोक विद्या सांस्कृतिक समिति द्वारा बनाए गए कुमाऊंनी भाषा में लिखित मातादेवी के भजनों का विमोचन किया। इस मौके पर उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की पूर्व सदस्य मंजुला बिष्ट और दीपक पांडे ने राज्यपाल को पुस्तक भेंट की। जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, एसएसपी रेणुका देवी, राज्यपाल के एडीसी असीम श्रीवास्तव, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह पिलख्वाल, युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष कुंदन लटवाल, नगर अध्यक्ष कैलाश गुरुरानी आदि भी मौजूद रहे। 
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चितई ग्वल देवता और जागेश्वर धाम के दर्शन किए 
अल्मोड़ा। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने रविवार सुबह चितई ग्वल देवता मंदिर के दर्शन किए और वहां पूजा अर्चना की। उन्होंने जिला प्रशासन से मंदिर में बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को असुविधा ना हो इसके लिए पार्किंग की व्यवस्था करने को कहा। बाद में वह जागेश्वर मंदिर गई और वहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदिर के बारे में जानकारी ली और मंदिर के साहित्य का अधिकाधिक प्रचार-प्रसार करने को कहा। मंदिर समिति के सहयोग से स्थानीय उत्पाद द्वारा बनाए जा रहे प्रसाद की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह अच्छा प्रयास है। मंदिर पहुंचने पर पुजारियों द्वारा उनका शॉल ओढ़ाकर कर स्वागत किया गया।
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