छावनी परिषद कार्यालय में घोंडीराम का स्वागत करते कर्मचारी
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पहाड़ की सर्पिली सड़कों पर बिना ब्रेक की साइकिल लेकर सेफ ड्राइविंग का संदेश देने कश्मीर से कन्याकुमारी की यात्रा पर निकले हैं सोलापुर महाराष्ट्र के घोंडीराम। बिना ब्रेक की साइकिल लेकर जब घोंडीराम रानीखेत पहुंचे तो यहां छावनी परिषद कार्यालय में उनका स्वागत किया गया। घोंडीराम कहते हैं कि आधुनिक तकनीक से सुसज्जित वाहनों में भी लोग अपनी गलती से दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं, वह साइकिल में ब्रेक नहीं होने के बावजूद सेव ड्राइविंग कर रहे हैं। लोगों को जागरूक करने के लिए वह अभी तक 50 हजार किमी की दूरी तय कर चुके हैं।
मूल रूप से महाराष्ट्र सोलापुर के जोड़ेगांव निवासी घोंडीराम ने साइकिल यात्रा इसी साल फरवरी से शुरू की। इस बीच वह महाराष्ट्र के अलावा एमपी, यूपी, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, चंडीगढ़ सहित तमाम राज्यों की यात्रा कर चुके हैं। पिछले कई महीनों से वह उत्तराखंड की यात्रा पर हैं। गढ़वाल मंडल के अलावा उन्होंने चार धाम और छोटा कैलाश की यात्रा भी तय कर ली है। खास बात यह है कि पहाड़ की ढलान वाली सड़कों पर भी वह बखूबी साइकिल चला लेते हैं। हालांकि अत्यधिक ढलान वाले स्थानों पर वह साइकिल हाथ में लेकर पैदल चलते हैं। घोंडीराम का कहना है कि वह सेव ड्राइविंग का संदेश लेकर निकले हैं, लोगों को इसके लिए जागरूक भी किया जा रहा है।
स्वामी विवेकानंद को मानते हैं प्रेरणास्रोत
47 वर्षीय घोंडीराम ने बताया कि वह स्वामी विवेकानंद को प्रेरणास्रोत मानते हैं। वह कहते हैं कि स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया का भ्रमण किया था और लोगों को मानवता का संदेश दिया था। वह सेफ ड्राइविंग के अलावा बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश भी दे रहे हैं। विद्यालयों में जाकर वह बच्चों को तो टैक्सी स्टैंडों पर चालकों को भी सेव ड्राइविंग का संदेश दे रहे हैं। उत्तराखंड की यात्रा भी अब अंतिम चरणों में है। रानीखेत से वह नैनीताल जाएंगे।