सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। सोमेश्वर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत भटकोट की पहाड़ी के जंगल में हैड़ाखंडी महाराज की पुरानी तपोस्थली देवामाई मंदिर और छेदू आश्रम में इन दिनों कुछ अवांछित लोगों की आवाजाही से आसपास के ग्रामीण आशंकित हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कुछ समय से इस आश्रम में संदिग्ध लोग अपनी घुसपैठ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। यही वजह है कि आश्रम में लंबे समय से रहने वाले महंत ज्ञान महाराज पलायन कर लोद गांव में रह रहे हैं। इससे आश्रम और मंदिर पर आस्था रखने वाले लोगों में भी रोष व्याप्त है।
लोद से करीब पांच किमी पैदल दूरी पर, ऊंची भटकोट पहाड़ी की तलहटी में बसे छेदू गांव के जंगल में प्राचीन देवामाई मंदिर है। यहां पर छेदू आश्रम में सिद्ध बाबा महादेव का मंदिर है। बताते हैं कि करीब सौ साल पहले हैड़ाखान महाराज ने यहां तप किया और देवामाई का मंदिर बनवाया। बाबा हैड़ाखान के बाद उनके शिष्य महेंद्र महाराज यहां रहे। मंदिर परिसर और आश्रम के पास करीब 34 नाली भूमि है। यह मंदिर भतौरा, हाथीखुर, अल्मियांगाव, तैलमैनारी, खगोली-बड़खोला गांव के लोगों की आस्था का केंद्र है।
लोगों ने बताया कि पूर्व में यहां महंत ज्ञान महाराज भी लंबे समय तक इस आश्रम से जुड़े रहे। ज्ञान महाराज हैड़ाखान महाराज के शिष्य महेंद्र महाराज के शिष्य हैं और छेदू आश्रम की पवित्रता-गरिमा बनाए रखने के साथ ही यहां के पर्यावरण के सुधार के लिए प्रयासरत रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कुछ समय से इस आश्रम में संदिग्ध लोग अपनी घुसपैठ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके चलते आश्रम में रहने वाले महंत ज्ञान महाराज को डेढ़ साल पहले आश्रम से पलायन करना पड़ा।
महंत ज्ञान महाराज सड़क से लगे लोद गांव में एक व्यक्ति द्वारा उपलब्ध कराए गए मकान में अपने दो भक्तों के साथ रह रहे हैं। अल्मियां गांव के प्रधान नारायण सिंह, बीडीसी सदस्य दिवाकर कार्की, वन विभाग से सेवानिवृत्त पूरन सिंह और आईटीबीपी से रिटायर हुए कालू सिंह का कहना है कि कुछ संदिग्ध लोग आश्रम में घुसपैठ बढ़ाकर मंदिर की व्यवस्थाओं में दखल देना चाहते हैं। यह लोग मंदिर परिसर की भूमि में इधर-उधर आग जलाकर पर्यावरण दूषित कर रहे हैं।
अल्मियां गांव के प्रधान नारायण सिंह का कहना है कि इन बाहरी लोगों पर अंकुश नहीं लगा तो मंदिर की पवित्रता को खतरा पैदा हो सकता है। बीडीसी सदस्य दिवाकर कार्की, पूरन सिंह, कालू सिंह आदि को यह भी आशंका है कि यह लोग मंदिर की भूमि पर कब्जा भी कर सकते हैं, जिससे शांत जगह पर स्थित इस आश्रम का माहौल बिगड़ सकता है।
उल्लेखनीय है कि छेदू आश्रम पिछले कुछ सालों से ही दुनिया की नजरों में आया है लेकिन दुर्गम स्थान पर होने के कारण आम भक्तों की भीड़ से बचा-बचा रहा है। अध्यात्म की अलग-अलग धाराओं के साधक यहां आकर एकांत साधना करते रहे हैं। यहां स्थानीय समाज की श्रद्धा को अवांछित लोगों के अतिक्रमण से बचाने के लिए लोगों का कहना है कि प्रशासन और वन विभाग को ऐसे तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए।