लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, हिम्मत करने वालों की हार नहीं होती। इस उक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है हवालबाग विकासखंड के बेह निवासी सुनील सिंह बिष्ट ने। उन्होंने कोरोना काल में दिल्ली से अपना व्यवसाय छोड़कर गांव लौटकर यहां बंजर पड़े खेतों को उपजाऊ बनाकर मोती की खेती का कार्य शुरू किया। पहले तो उन्हें लगा कि जीवन अब कैसे चलेगा लेकिन संघर्ष और जुनून ने सफलता की राह खोल दी।
सुनील ने पहले सामान्य खेती की। शुरुआती संघर्ष के बीच खेती में फायदा होने से सुनील ने अपने नाम और काम को बढ़ाने के लिए यूट्यूब का सहारा लिया। इसके माध्यम से मोतियों की खेती करना सीखा। उन्होंने नई मिसाल पेश कर 100 वर्गमीटर के तालाब से 450 सीप के साथ मोतियों की खेती शुरू की जो खूब सफल रही। सुनील के अनुसार इससे उन्हें सालाना चार लाख रुपये की कमाई हो रही है। उन्होंने अपने साथ तीन लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा है। सुनील जिले में मोतियों की खेती करने वाले पहले किसान हैं।
राजस्थान से लाए सीप
सुनील ने बताया कि मोती उत्पादन के लिए सीप राजस्थान से मंगाए। बताया कि एक सीप से दो मोती निकलते हैं। एक डिजाइनर मोती का न्यूनतम मूल्य 120 रुपये के करीब होता है। सीप में मोती तैयार होने में करीब 18 से 24 माह का समय लगता है। इनकी ज्वैलरी शॉप में काफी मांग है।
डाई से तैयार होते हैं अलग-अलग डिजाइन के मोती
सुनील ने बताया कि सीप को तालाब में डालने से पहले उनकी सर्जरी कर उनमें लक्ष्मी-गणेश, गौतम बुद्ध सहित कई तरीके की डाई डाली जाती है। ऐसे में सीप से पैदा होने वाला मोती विभिन्न प्रकार के आकार में ढल जाता है। अपने संघर्ष, लगन और जुनून के कारण माेतियों की खेती वाले सुनील इलाके में काफी मशहूर भी हो रहे हैं।