सुअरों के आतंक से परेशान काश्तकार आजीविका परियोजना के तहत हुई तारबाड़ से खेतों की तस्वीर बदलने में कामयाब हुए हैं। आईएफएफडीसी द्वारा उपलब्ध कराए गई एल्यूमिनियम कोटेड फेंसिंग खेती के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। इसी बाड़ की मदद से रामपुर के चौकुड़ी में सात महिलाओं ने समूह बनाकर महज पंद्रह दिन में ही टमाटर और भिंडी मिलाकर दो क्विंटल सब्जी बेच दी है। इससे निकटवर्ती गांवों की महिलाएं भी प्रेरित हो रही हैं।
एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना (आईएलएसपी) की तकनीकी एजेंसी आईएफएफडीसी के माध्यम से महिला उत्पादक समूह को उपलब्ध कराई गई एल्यूमिनियम कोटेड फेंसिंग सुअरों पर लगाम लगाने में खासी कारगर सिद्ध हो रही है। रामपुर के चौकुड़ी में मां अगनेरी सहकारिता से जुड़ीं अंजनि महिला समूह की सात महिलाओं ने करीब सात नाली भूमि में एल्यूमिनियम कोटेड फेंसिंग लगाकर टमाटर, भिंडी, बैगन और फ्रासबीन का अच्छा उत्पादन किया है। महिलाओं का कहना है कि वह महज पंद्रह दिनों में ही एक क्विंटल से भी अधिक टमाटर और इतनी ही भिंडी बेच चुकी हैं। डेढ़ मीटर ऊंची तारबाड़ से सुअरों से होने वाले नुकसान से मुक्ति मिल गई है।
उन्होंने बताया कि उन्हें आईएफएफडीसी के समन्वय देश दीपक यादव, आजीविका समन्वयक योगेश मेहरा के अलावा उद्यान अधिकारी रिक मुखर्जी, अनूप शर्मा, हरीश नेगी, आरआर जोशी और समूह प्रोत्साहक कमला बिष्ट का मार्ग दर्शन और सहयोग मिलता रहता है। समूह में अध्यक्ष खिमुली देवी, लीला, नीमा, हेमा, किरन, चंपा और दीपिका सहित सात महिलाएं शामिल हैं।
सात गावों की तीन सौ नाली जमीन में किया जा रहा प्रयोग
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। आईएफएफडीसी के परियोजना समन्वयक देश दीपक यादव ने बताया कि परियोजना के माध्यम से रामपुर के अलावा आदिग्राम कनोणियां, नौगांव अखोड़िया, असेठी, नौगांव बेडिंया, टेड़ागांव, नागाड़ आदि सात ग्राम पंचायतों में करीब तीन सौ ग्यारह नाली में यह प्रयोग किया जा रहा है।