(दरबान रावत) धौलछीना (अल्मोड़ा)। व्यापार मंडल धौलछीना के सदस्यों ने आपसी सहयोग की मिसाल पेशकर सरकार को आइना दिखाया है। जब सरकार ने उनकी समस्या का निदान नहीं किया तो उन्होंने पेयजल और स्वच्छता समिति बनाकर सबमर्सिबल लगाकर खुद के लिए पानी की व्यवस्था की। समिति व्यापारियों से चंदा इकट्ठा कर जलापूर्ति व्यवस्था का खर्च जुटाती है।
धौलछीना में पूर्व में बनी बिनसर धौलछीना पेयजल योजना लोगों की प्यास बुझाने में नाकाफी साबित हो रही है। सालों से ग्रामीण धौलछीना के लिए पेयजल योजना की मांग करते आ रहे हैं। कोई सुनवाई नहीं हुई तो व्यापार मंडल ने स्वयं ही पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था करने की ठानी।
धौलछीना बाजार से लगभग 100 मीटर आगे लगा हैंडपंप लंबे समय से उपेक्षित था। बाजार से दूर होने के कारण कोई भी इसका इस्तेमाल नहीं कर रहा था। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने संबंधित विभाग के संग बैठक कर हैंडपंप में सबमर्सिबल पंप लगाकर पानी खींचने की योजना बनाई।
नई पेयजल लाइन बिछाने और सबमर्सिबल पंप के लिए व्यापारियों से चंदा इकट्ठा किया। शुरुआत में लोगों को इस योजना के सफल होने में संदेह भी था फिर धीरे-धीरे लोग जुड़ते गए।
बीते सितंबर में व्यापारियों ने 280 फीट गहरे हैंडपंप में सबमर्सिबल पंप लगाकर पानी खींचा। लगभग डेढ़ इंच मोटे पाइप से पानी को एक टैंक में स्टोर किया जाता है फिर वहां से पानी की सप्लाई लोगों के घरों को की जाती है। इन सब में करीब सवा दो लाख का खर्च आया।
रखरखाव के लिए प्रतिमाह लिए जाते हैं 100 रुपये
धौलछीना (अल्मोड़ा)। वर्तमान में इस योजना से 28 व्यापारियों और पांच अन्य लोगों को पानी की सप्लाई दी जा रही है। वर्तमान में प्रतिदिन दो घंटा पानी की सप्लाई की जा रही है।
यात्रियों के लिए व्यापार मंडल ने बाजार में दो सार्वजनिक स्टैंड पोस्ट बनाएं हैं, जिसमें 24 घंटे पानी उपलब्ध रहता है। दिव्यांग लोक कलाकार संत राम को निशुल्क पेयजल सुविधा दी गई है।
अन्य से प्रतिमाह बिजली बिल और रखरखाव के लिए 100 रुपये लिए जाते हैं। शादी ब्याह, लिंटर आदि के लिए 500 रुपये जमा करवा कर अतिरिक्त पानी दिया जाता है।
इन्होंने दिया सहयोग
इस योजना को बनाने में व्यापार मंडल अध्यक्ष डीएस रावत, महासचिव चंदन सिंह मेहरा, मनमोहन सिंह, संजय जीना गोपाल मेहरा, लाल सिंह मेहरा, मोहन मिश्रा आदि लोगों ने सहयोग दिया।
क्या कहते हैं लोग
पहले गाड़ियों से पानी ढोकर गुजारा करना पड़ता था। जब से योजना बनी है तबसे काफी राहत महसूस हुई है। जब जरूरत हो पानी उपलब्ध हो जाता है। - प्रकाश वर्मा, सदस्य व्यापार मंडल
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बच्चों का अधिकतम समय पानी ढोने में लग जाता था। इससे पढ़ाई में प्रभावित होती थी। जब से योजना बनी तब से से बच्चों को पानी नहीं ढोना पढ़ता है। - कमला रावत, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य
एक कर्मचारी हमेशा पानी भरने में ही लगा रहता था। उसके बाद भी पानी की आपूर्ति नहीं हो पाती थी। योजना बनने के बाद अब एक लेबर की मजदूरी बच रही है।- चंदन सिंह मेहरा, होटल व्यवसायी
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बाहर से आने वाले यात्रियों को पानी के लिए भटकना पड़ता था। अब वह बंद हो गया है। बाजार में अब 24 घंटे पानी उपलब्ध है। इसके लिए व्यापार मंडल का शुक्रिया। - सूबेदार गंगा सिंह मेहरा