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राज्य की सरकारें संग्रहालय में निदेशक नियुक्त करने में फेल

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अल्मोड़ा का राजकीय संग्रहालय। - फोटो : amar ujala
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राज्य में सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए तमाम दावे और घोषणाएं होती रहती हैं, लेकिन असलियत यह है कि अल्मोड़ा में स्थित कुमाऊं के एकमात्र राजकीय संग्रहालय में निदेशक का पद 20 साल से भी अधिक समय से खाली है। राज्य बनने के बाद से आज तक की कोई भी सरकार अल्मोड़ा में स्थित इस संग्रहालय में निदेशक की नियुक्ति नहीं कर सकी है। संस्कृति विभाग के अधीन अल्मोड़ा में कुमाऊं स्तरीय क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी का पद भी आठ साल से खाली है। 

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अल्मोड़ा में राजकीय संग्रहालय की स्थापना संयुक्त उत्तर प्रदेश के समय 1979 में हो गई थी। इस संस्थान में तीन हजार से अधिक मूर्तियां, महत्वपूर्ण सिक्के, पेंटिंग आदि समेत कई कृतियां सहेज कर रखी गई हैं। जिन्हें देखने पर्यटक और अन्य लोग आते हैं। कई लोग विभिन्न तरह के शोध कार्य और अध्ययन आदि के लिए भी संग्रहालय का भ्रमण करते हैं लेकिन इस संस्थान की शुरू से ही उपेक्षा होती रही है।

संस्थान में निदेशक का पद 1997 से खाली है। राज्य बनने के बाद से अब पांचवीं सरकार सत्ता में आ गई है लेकिन आज तक की कोई सरकार संग्रहालय में पूर्ण कालिक निदेशक की तैनाती करने में विफल रही है। बताया जाता है कि इस पद को विभाग से पदोन्नति करके भरा जाना है, लेकिन पता नहीं किन कारणों से मसला लंबे समय से लटका हुआ है। निदेशक का पद खाली रहने से संग्रहालय के प्रबंधन पर असर पड़ना स्वाभाविक है। यही नहीं अल्मोड़ा में स्थित संस्कृति विभाग की एक अन्य संस्था क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई पर कुमाऊं के पुरातत्व धरोहरों की देखरेख की जिम्मेदारी है लेकिन इस संस्था के भी क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी का पद 2011 से खाली है। फिलहाल इस पद पर भी काम चलाऊ व्यवस्था चल रही है।   

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