विश्व गौरैया दिवस पर सिविल और सोयम वन प्रभाग की ओर से इंसप्रेशन पब्लिक स्कूल एनटीडी में हुए कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता की चकाचौंध में गौरैया का वंश कम होते जा रहा है जो चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि कभी गौरैया हर घर के आंगन में चहकती थी लेकिन आज इसके अस्तित्व पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी मनोज लोहनी और स्कूल प्रबंधक तारू तिवारी ने कहा कि गौरैया प्राचीनकाल से मानव की मित्र रही है। उन्होंने गौरैया के संरक्षण पर जोर दिया। इस मौके पर प्रधानाचार्य रचना विल्सन, वन रक्षक हेमा पाठक, वेद प्रकाश तिवारी, प्रदीप लोहनी, राजेंद्र मेहरा, पुष्कर आर्या, अंशुल पांडे, मंजू सिंह, गुंजन जोशी, ज्योति जोशी, पार्वती बिष्ट मीना तिवारी आदि मौजूद थे। वन क्षेत्र अल्मोड़ा कार्यालय में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए रेंजर मोहन राम आर्य ने कहा कि दो दशक से गौरैया के वंश में कमी आ रही है। संचालन वन दरोगा बीएस बिष्ट ने किया। इस मौके पर उप वन रेंजर केवलानंद पांडे, दीपक कुमार पंत, बहादुर सिंह बिष्ट, गोकुलानंद तिवारी ने विचार रखे।
उधर लोअर मालरोड में वीर सावरकर नगर में हुई गोष्ठी में प्रो. एनएस भंडारी ने कहा कि गौरैया जैव विविधता की महत्वपूर्ण घटक है। उत्तराखंड के लोक जीवन और ग्रामीण अंचलों का गौरैया विशेष अंग रही है। प्रधान भुवन राठौर ने कहा कि प्रत्येक घर में गौरैया के लिए घोंसले की व्यवस्था की जाए। उन्होंने अपने आवास में भी ऐसी व्यवस्था की है। गोष्ठी में नवीन भट्ट, दीवान फर्त्याल, प्रो. एसके खंडेवाल, सुरेश सुयाल, ललित लटवाल, दीप कांडपाल, योगेश नयाल, दीपक बिष्ट, दीपक बिष्ट, राजशेखर तिवारी, मोनू कनवाल, प्रकाश लोहनी, तनुज जोशी मौजूद थे।