अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) की ओर से रैलाकोट में सोयाबीन और भट (काला सोयाबीन) प्रक्षेत्र दिवस मनाया गया।
संस्थान के वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों में लगाए गए अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनों का निरीक्षण किया। इस मौके पर निदेशक डॉ. लक्ष्मी कांत ने कहा कि सोयाबीन एवं भट पोषण सुरक्षा और आय सृजन दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण फसल है।
ये फसलें भूमि की उर्वरता बढ़ाने, कृषि विविधता को बढ़ने और जलवायु सहिष्णुता में भी योगदान देती हैं। इन फसलों की उच्च मांग है, जिसके कारण इनके उत्पादन से किसानों को बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त हो सकता है।
किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर वैज्ञानिकों से संवाद किया और व्यावहारिक सुझाव प्राप्त किए। फसल सुधार विभागाध्यक्ष डॉ. निर्मल हेड़ाऊ ने किसानों को अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन कराने के उद्देश्य को समझाया।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अनुराधा भारतीय ने बताया कि केंद्र सरकार की सोयाबीन की अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के तहत इस वर्ष सोयाबीन एवं भट की नवीन प्रजातियों वीएल सोया 89 और वीएल भट 202 की वैज्ञानिक खेती के अग्रिम पंक्ति प्रदर्शन जिले के रैलाकोट, दिगोटी और निरई में लगाए गए थे ताकि नवीनतम अनुसंधान उपलब्धियां सीधे किसानों तक पहुंच सके।
डॉ. अनुराधा ने अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनों का समन्वयन एवं प्रक्षेत्र दिवस कार्यक्रम का संचालन किया।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. कामिनी बिष्ट, वैज्ञानिक डॉ. राजेंद्र मीणा, तकनीकी अधिकारी निधि सिंह ने सोयाबीन एवं भट की रोग-प्रतिरोधी उन्नत किस्मों के साथ-साथ मूल्य संवर्धन तकनीकों (जैसे टोफू, सोया दूध, दही आदि निर्माण), खरपतवार प्रबंधन, कीट प्रबंधन और संगठित होकर व्यवसायिक स्तर पर सोयाबीन और भट को लाभप्रद बनाने की जानकारी दी। वहां वरिष्ठ शोधार्थी डॉ. हेमलता जोशी, सुरेंद्र नाथ आदि मौजूद रहे।