फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सौम्या ने बीटेक करने के बाद ठानी आईएएस बनने की

Thu, 01 Jun 2017 11:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
विज्ञापन
सौम्या अपने परिजनों के साथ - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
दृढ़ संकल्प और मेहनत के साथ धैर्य रखकर आगे बढ़ते रहें तो तो कठिन मंजिल भी आसान हो जाती है। यह साबित करके दिखाया है अल्मोड़ा के गुरुरानीखोला की रहने वाली सौम्या गुरुरानी ने। बीटेक करने के बाद ही यह निर्णय कर लिया कि उन्हें कारपोरेट सेक्टर में जॉब नहीं करना है और आईएएस बनने की ठान ली। वह पहले साल 2014 में प्रारंभिक परीक्षा में सफलता के बाद मुख्य परीक्षा में असफल रहीं। फिर दूसरे प्रयास 2015 में प्रारंभिक परीक्षा में रह गईं पर सौम्या ने हौसला नहीं छोड़ा। आखिरकार तीसरे प्रयास में 148वीं रैंक हासिल करके अल्मोड़ा का गौरव बढ़ाया है।
विज्ञापन

गुरुरानीखोला निवासी एसबीआई में उप शाखा प्रबंधक नवीन चंद्र गुरुरानी और जूनियर हाईस्कूल महेला (हवालबाग) में सहायक शिक्षिका नमिता गुरुरानी की बेटी सौम्या ने 2009 में कूर्मांचल एकेडमी अल्मोड़ा से बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की।

उसके बाद उन्होंने कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग रुड़की में बीटेक में प्रवेश लिया और 2013 में बीटेक पास आउट हो गईं। इस बीच उनका एक मल्टी नेशनल कंपनी में कैंपस सलेक्शन भी हो गया, लेकिन तभी उन्होंने यह तय कर लिया कि वह कारपोरेट में जॉब करने के बजाय सिविल सर्विसेज की तैयारी करेंगी और उन्होंने करीब आठ महीने दिल्ली में रहकर कोचिंग भी ली। दिलचस्प बात यह है कि सौम्या पिछले दो साल से लगातार अल्मोड़ा में रहकर ही तैयारी करती रहीं। उनका कहना है कि आज इंटरनेट में सब कुछ उपलब्ध है और अल्मोड़ा में बैठकर तैयारी करने में उन्हें कोई दिक्कत नहीं आई। सौम्या ने बताया कि मेन्स में उन्होंने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन को वैकल्पिक विषय के रूप में लिया था।
विज्ञापन


सौम्या का छोटा भाई गौतम गुरुरानी भी पंतनगर विवि से बीटैॅेक करने के बाद टीसीएस अहमदाबाद में जॉब कर रहा है। उन्होंने बताया कि सिविल सर्विसेज परीक्षा में सफलता हासिल करने में जहां माता-पिता का पूरा सहयोग मिला वहीं ताऊ रमेश चंद्र गुरुरानी और हल्द्वानी में तैनात एसपी विजिलेंस अमित श्रीवास्तव भी उन्हें प्रेरित करते रहे। सौम्या के मुताबिक पहले साल उन्होंने प्रतिदिन सात-आठ घंटा पढ़ाई की और फिर बाद के दो वर्षों में चार-पांच घंटे नियमित अध्ययन करती थीं। उनका कहना है कि सिविल सर्विसेज की तैयारी के लिए धैर्य और लगन की काफी जरूरत होती है। असफल हो जाने के बाद निराश नहीं होना चाहिए। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें