सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। बादल फटने से हुए नुकसान से सोमेश्वर घाटी के कई गांवों में जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। क्षेत्र में छह पैदल पुलिया, स्टेट हाईवे सोमेश्वर-बिंता-रानीखेत मार्ग में तीन स्थानों पर पुल बह गए हैं। धौनीगाड़ पुलिया के बगल में गैराज में खड़ी ऑल्टो कार नाले में बहकर पुलिया में दब गई। मलबा आने से क्षेत्र में सैकड़ों नाली कृषि भूमि मलबे की भेंट चढ़ गई। किसान परेशान हैं।
बारिश से सांई नदी, गधेरों ने भारी तबाही मचाई है। रैत, नैकाना, फल्टा, नागजोशी, दियारी पैदल पुलिया समेत दियारी गांव की लोहे की पुलिया टूटने से 36 से अधिक गांवों के लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया है।
सांई नदी के उफान में आने से नदी के दोनों ओर जबर्दस्त भूकटाव हुआ। जिससे कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है। वहीं बौगाड़, लखनाड़ी, सुकराड़, द्यौनीगाड़, झुपुलचौरा, अर्जुन राठ गांव से होकर बहने वाले गधेरों से आए मलबे से रौसेरा, फल्टा सेरा, चनोली सेरा, बले, पल्यूड़ा, झुपुलचौरा, लखनाड़ी सेरा, खाड़ी सुनार सेरे में सैकड़ों नाली भूमि में रोपी गई धान की पौध बर्बाद हो गई है।
इससे करीब सौ से अधिक किसान प्रभावित हुए हैं। अर्जुन राठ गधेरे के उफान में आने से सुरक्षा दीवारें ध्वस्त हो गईं। जिससे केशर सिंह, कुंदन सिंह, राम सिंह, शेर सिंह, मल्ला खोली निवासी प्रेम सिंह के मकानों को भी खतरा हो गया है।
गांव की अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्ती को जाने वाली पुलिया, रास्ता भी टूट गया है। लोग दूसरे स्थान से चल रहे हैं। बरगला में विशन सिंह के मकान को भूकटाव का खतरा होने से वह पड़ोसी के यहां रह रहे हैं। धन्यारी गांव में भी दो मकान, लखनाड़ी में पूरा सिह के मकान को खतरा हो गया है। कोसी, सांई नदी में स्थित नहरों के सभी तटबंध ध्वस्त हो गए हैं। नहरों को भी काफी नुकसान पहुंचा है।