जिले के लिए नागरिकों ने स्मृति धरना-टू के नाम से सुभाष चौक पर धरना दिया। अधिकांश वक्ताओं ने सरकार पर रानीखेत जिले के मामले को जबरन लटकाने का आरोप लगाया। तय हुआ कि रानीखेत जिले की लड़ाई के लिए अब आरपार की जंग शुरू होगी।
सुभाष चौक पर स्मृति धरना टू में भी भारी संख्या में लोग पहुंच गए। वक्ताओं ने कहा कि 2007 में तत्कालीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने खड़ी बाजार चौराहे से भाजपा प्रत्याशी को जिताने पर जिला बनाने का आश्वासन दिया।
इसके बाद 2011 में चुनाव को देखते हुए भाजपा ने जिले की घोषणा कर रानीखेत जनता को पूरी तरह से बेवकूफ बनाया, अब कांग्रेस की सरकार के मुखिया भी जुमलों के माध्यम से जनता का इम्तिहान ले रहे हैं। कहा कि जिले को लेकर जनप्रतिनिधियों की मंशा साफ होती तो रानीखेत जिला बनता और विकास के नए सोपान छू लेता।
तय हुआ कि नुक्कड़ सभाओं और विभिन्न स्थानों पर धरना प्रदर्शनों के माध्यम से आंदोलन के लिए समर्थन जुटाया जाएगा। अगला स्मृति धरना-थ्री सात दिसंबर को सुभाष चौक में होगा। इस बीच जनसंपर्क अभियान चलेगा। अध्यक्षता मोहन नेगी ने और संचालन विमल सती ने किया, संयोजक डीएन बडोला ने जनसहभागिता बढ़ने पर संतोष व्यक्त किया।
पटवारी महासंघ के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष बंशीधर मठपाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष यतीश रौतेला, हर्ष ललित पंत, संजय पंत, विनोद चंद्र, चंद्रशेखर पाठक, नारायण सिंह बिष्ट, बीएस नेगी, कामरान कुरैशी, मनोज अग्रवाल, धन सिंह बिष्ट, अब्दुल खान, पावस जोशी, रमन भट्ट, रोहित नेगी, रोजी अली खान, एमसी जोशी, इदरीश बाबा, डॉ. वेद प्रकाश, एसएस राना आदि थे।