मंगलवार रात युवक के मेडिसन वार्ड में विषाक्त पदार्थ खाकर आत्महत्या करने से जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक युवक वार्ड में घुसा और जहरीला पदार्थ खाकर वहीं आत्महत्या कर ली लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। यदि अस्पताल परिसर में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हुए तो भविष्य में कभी कोई बड़ी घटना भी घट सकती है।
मालूम हो कि मंगलवार रात के समय एक युवक जिला अस्पताल में आया और मेडिसन वार्ड में घुसकर विषाक्त पदार्थ खाकर खुदकुशी कर ली लेकिन युवक के वार्ड में घुसने की सुरक्षा कर्मियों को भनक नहीं लगी। जिस वार्ड में युवक ने आत्महत्या की वह कक्ष खाली था और वहां कोई अन्य मरीज भर्ती नहीं था। यदि इस खाली पड़े वार्ड में ताला लगा होता तो युवक वहां घुसकर आत्महत्या नहीं कर पाता। खासकर रात के वक्त वार्ड में आने जाने वालों पर नजर नहीं रखी गई तो कभी बड़ी घटना भी घट सकती है। ऐसे में कोई अपराधी भी छिपने के लिए वार्ड में घुस सकता है। इससे मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल कर्मियों को खतरा हो सकता है।
जिला अस्पताल मुख्य बाजार और मालरोड के मध्य स्थित है। अस्पताल में पहुंचने के लिए मालरोड से एक गेट और बाजार क्षेत्र से दो गेट हैं। कई लोग अस्पताल के रास्ते को मुख्य बाजार और मालरोड में आने जाने के लिए उपयोग करते हैं। मुख्य बाजार में भीड़ होने पर लोग एक गेट से अस्पताल परिसर में प्रवेश कर लोहे के शेर के पास के गेट से निकल जाते हैं। वहीं अस्पताल के मूत्रालयों का उपयोग राह चलते और आसपास के लोग भी करते हैं। अस्पताल परिसर में मरीजों के तीमारदारों के अलावा अन्य लोग भी घूमते रहते हैं।
अस्पताल में भीड़ होने पर पूर्व में जेब कतरे मरीजों की जेब तक काट चुके हैं। दो साल पूर्व असामाजिक तत्वों ने कुछ लोगों से अल्ट्रासाउंड शुल्क के लिए पांच सौ रुपये ऐंठ लिए थे। लेकिन इन घटनाओं का कोई सुराग नहीं लगा।
अस्पताल प्रशासन के पास पर्याप्त सुरक्षा गार्ड भी नहीं हैं।
अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. जीसी पांडे ने बताया कि सात सुरक्षा गार्डों में से प्रत्येक शिफ्ट में दो-दो गार्ड तैनात रहते हैं। जबकि अस्पताल परिसर में तीन गेट, वार्ड और आवासीय भवन है। सुरक्षा के लिहाज से गार्डों की संख्या बढ़ाएं तो पद ही सृजित नहीं है। उन्होंने बताया कि अस्पताल भवन के भीतर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।