पर्यटन को बढ़ावा देने की प्रदेश सरकार की मंशा को अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। चौखुटिया का पर्यटक सूचना केंद्र व रैन बसेरा इसका उदाहरण हैं। बद्रीनाथ, केदारनाथ, हेमकुंड और फूलों की घाटी जाने वाले यात्रियों व पर्यटकों का मुख्य पड़ाव चौखुटिया में पर्यटन सीजन को लेकर सरकारी स्तर पर तैयारियां शून्य हैं। 2006 में बने पर्यटक सूचना केंद्र में ताला लटका है तो कूडे़ से भरे कमरों के प्रवेश द्वार पर काई जमी है।
इसी भवन के करीब दो साल पहले पर्यटन सर्किल के तहत बनाए गए रैन बसेरे के चारों तरफ झाड़ियां उग आईं हैं। इनके निर्माण के बाद पर्यटक तो दूर संबंधित अधिकारी भी भवनों की सुध लेने नहीं पहुंचे। केदारनाथ त्रासदी के बाद प्रदेश सरकार पर्यटकों को सुरक्षित और सुगम यात्रा का भरोसा दिला रही है। इसके उलट जिला प्रशासन तथा पर्यटन विभाग का इस सब चीजों से कोई वास्ता नहीं है। वरना यात्रा मार्गों पर बनाए गए इस तरह के भवनों की दशा जरूर सुधर गई होती।
पर्यटकों को नहीं मिला फायदा
निर्माण कार्यों के प्रस्ताव बनाने वाले अधिकारियों को प्रदेश के लाभ के बजाए अपना जेब भरने की चिंता ज्यादा है। सूचना केंद्र व रैन बसेरा तो बन गये। बनाने और बनवाने वालों का बैंक बैलेंस भी बढ़ गया। परंतु इससे पर्यटक, तीर्थयात्री व प्रदेश को कोई लाभ नहीं हो पाया।
नहीं लगी झाडू़
पर्यटन विभाग ने पर्यटक सूचना केंद्र व रैन बसेरा की साज सज्जा व जरूरी सुविधाएं तो दूर उनकी साफ सफाई तक का ध्यान नहीं रखा है। विभाग ने तो दरवाजों में लटके ताले खोलकर झाडू लगाने की जरूरत भी नहीं समझी है।
गुणवत्ता पर भी सवाल
दो साल पूर्व बने रैन बसेरे की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। महज छह पिलरों के सहारे खड़ा किए गए रैन बसेरे की छत में भी लोहे की पतली चादरें लगाई गई हैं। जो आंधी तूफान के बडे़ झोंके को सहन करने में भी सक्षम नहीं है।