सरकारी विद्यालयों की बदहाली को लेकर सवाल अक्सर उठते रहे हैं। कभी स्कूल में सुविधाओं का रोना रोया जाता है तो कभी शिक्षकों की कमी का। लेकिन, इन सब के बीच भैंसियाछाना ब्लॉक का प्राइमरी विद्यालय कई मायनों में यहां के प्राइवेट स्कूलों को टक्कर दे रहा है। यहां तैनात शिक्षक उमेश सिंह मनराल की कर्मठता और जुनून ने विद्यालय की तस्वीर बदल दी है। उन्होंने अंग्रेजी भाषा से बच्चों को कुछ ऐसे रूबरू कराया कि बच्चे बेहिचक अंग्रेजी बोलते हैं। यही नहीं, जहां सरकारी स्कूलों में हर वर्ष छात्र संख्या घट रही है, वहीं इस विद्यालय में बच्चों की संख्या 14 से 61 हो गई है।
1944 में अंग्रेजों के जमाने में बने राजकीय प्राथमिक विद्यालय धौलछीना सही मायनों में एक आदर्श विद्यालय है। यह विद्यालय पहले अन्य प्राइमरी विद्यालयों की तरह ही था। जिलाधिकरी ईवा आशीश ने जिले के छह विद्यालयों को हाईटेक बनाने का जिम्मा लिया था। उन्हीं में एक प्राथमिक विद्यालय धौलछीना भी है। उन्होंने अनटाइड फंड से स्कूल को दो लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की। इससे स्कूल में फर्नीचर, वॉल पेंटिंग, स्लोगन और प्यूरीफायर लगाया गया है। विद्यालय में स्मार्ट क्लास लगती है। कांवेंट स्कूलों की तर्ज पर अभिभावक-अध्यापकों की बैठक भी होती है। ज्ञानवर्धक शिक्षा देने के लिए विद्यालय में स्मार्ट टीवी भी लगा है। बच्चे यहां सफेद बोर्ड पर मार्कर पैन से लिखते हैं। उच्च कोटि के फर्नीचर के अलावा विद्यालय के बच्चों के लिए साफ टॉयलेट, पुस्तकालय, मिड डे मील के लिए भोजन कक्ष की भी सुविधा है। स्मार्ट क्लास की दीवारों पर रंग-रोगन और आर्कषक चित्रकारी की गई है। स्वच्छ विद्यालय परिसर देखकर कहीं से भी ऐसा नहीं लगता है कि यह सरकारी प्राइमरी विद्यालय है।
विद्यालय की तस्वीर बदलने में यहां तैनात सहायक शिक्षक उमेश सिंह मनराल की मेहनत और लगन भी कम नहीं है। उन्होंने विद्यालय में सुविधाएं जुटाने में पूरा योगदान तो दिया ही है साथ ही बच्चों को अंग्रेजी भाषा में दक्ष बनाने का भी वह भरसक प्रयास कर रहे हैं। बच्चे अंग्रेजी बेहिचक बोलते हैं। स्मार्ट कक्षाओं में बच्चे प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ाई करते हैं। पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होते हैं।