खजुरानी में पीड़ित परिवार के सदस्य।
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तहसील के सबसे दूरस्थ गांव खजुरानी में न्यूरो मस्कूलर स्पार्म बीमारी से सरिता की मौत के बाद खूब हो हल्ला हुआ था। इसको लेकर बड़े-बड़े वादे भी किए गए थे। उसकी मौत को एक माह का समय बीतने को है, लेकिन अब तक बड़ी सरकारी सहायता राशि तो दूर बीमारी से जूझ रहे परिवार के शेष सदस्यों को उपचार के लिए बाहर ले जाने की बात भी पूरी नहीं हो पाई है। परिवार को अब तक व्यक्तिगत रूप से दी गई करीब 60 हजार रुपये की सहायता राशि ही मिल पाई है। परिवार की मुखिया जानकी का कहना है कि बाकी सब सहायता छोड़ो, लेकिन मेरे परिवार के बचे हुए चार सदस्यों को असमय मौत के मुंह में जाने से तो बचा लो।
ग्राम पंचायत खजुरानी निवासी पूर्व फौजी स्व. लाल सिंह की पोती सरिता की न्यूरो मस्कूलर स्पार्म बीमारी से मौत के बाद मामला सुर्खियों में रहा था। सरिता की मौत का मामला सीएम के दरबार तक पहुंचने के बाद जिले का प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। विधायक महेश नेगी ने जब इसे भूख से मौत बता कर सीएम को चिट्ठी लिखी थी तो खजुरानी पहुंचने वाले अधिकारियों की बाढ़ सी आ गई, परंतु घटना के एक माह बाद वादों को ठिकाना नहीं है।
सरिता की मां जानकी ने बताया कि गांव पहुंचे अधिकारियों ने उनसे सीएम की ओर से एक लाख की मदद राशि स्वीकृत होने बात कही थी, परंतु अब तक धनराशि नहीं मिली है। बताया कि अधिकारियों ने बीमारी से पीड़ित परिवार के शेष सदस्यों को उपचार के लिए बाहर ले जाने की बात भी कही थी।
इसके लिए बीते 29 अप्रैल की तिथि तय की गई, फिर 2 मई को बाहर ले जाने की सूचना मिली परंतु इस दिशा में कुछ नहीं हो पा रहा है। गौरतलब है कि वर्तमान में जानकी का देवर अर्जुन (39), ननद लक्ष्मी (41), बेटा दीवान (21) और हरसिंह (16) इस बीमारी से ग्रस्त होकर दिव्यांगता की चपेट में हैं। दिव्यांग परिवार के पालन पोषण के साथ ही उनकी देखभाल करना जानकी के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जानकी का कहना है कि यदि बीमारी से जूझते परिजनों का समय पर उपचार नहीं हुआ तो उनका भी परिवार के तीन अन्य सदस्यों की तरह असमय मौत के मुंह में जाना तय है।