अल्मोड़ा। अल्मोड़ा शहर और आसपास के क्षेत्रों के पेयजल संकट के निदान के लिए केंद्र सरकार द्वारा ढाई साल पहले मंजूर 1.68 अरब लागत की सरयू-सेराघाट-अल्मोड़ा पेयजल योजना को शासन की टेक्निकल एप्रुवल कमेटी (टीएसी) ने मंजूरी दे दी है, लेकिन व्यय वित्त समिति (ईएफसी) से मंजूरी का इंतजार है। ईएफसी से मंजूरी नहीं मिलने से योजना का काम अधर में लटका हुआ है।
शहर और आसपास के इलाकों में पेयजल संकट रहता है। कोसी और अन्य क्षेत्रों से बनी पेयजल योजनाओं से मांग के अनुरूप पर्याप्त पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए वर्षों पूर्व से सरयू-सेराघाट-अल्मोड़ा पेयजल योजना की मांग उठती रही। जल निगम ने योजना का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था।
योजना की अधिक लागत को देखते हुए राज्य सरकार ने इसे केंद्र सरकार को भेजा था। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने 17 दिसंबर 2013 को स्पेशल प्लान में इस योजना को स्वीकृति दी। 1.68 अरब लागत की इस योजना के लिए केंद्र सरकार ने 15 करोड़ रुपये भी मंजूर किए।
पेयजल निगम द्वितीय निर्माण शाखा ने योजना की डीपीआर बनाई। सेराघाट से अल्मोड़ा तक 18-18 इंच की 100 किमी लंबी डबल लाइन बिछाने और चार स्थानों पर पंप प्रस्तावित किए हैं। यदि योजना बनती है तो नगर को 10.41 एमएलडी अतिरिक्त पानी मिलने लगेगा। जो कि 2048 तक लोगों की जरूरतों के लिए पर्याप्त होगा। विभाग ने डीपीआर बनाकर पिछले साल उत्तराखंड शासन को भेज दी थी, लेकिन व्यय वित्त समिति की मंजूरी नहीं मिलने से योजना का काम प्रारंभ नहीं हो सका है।