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35 करोड़ से सरयू-दन्यां-बेलक योजना बनकर तैयार

Mon, 12 Dec 2016 11:16 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, अल्मोड़ा।
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 पेयजल संकट से जूझ रहे धौलादेवी ब्लॉक के 200 से अधिक गांवों की करीब 20 हजार की आबादी को आने वाली गरमी में पानी के संकट से निजात मिलने की उम्मीद है। करीब 35 करोड़ रुपए की लागत से बन रही सरयू-दन्यां-बेलक पंपिंग योजना का काम पूरा हो चुका है। पंपिंग चालू करके टेस्टिंग काम शुरू हो गया है और इन दिनों योजना के अंतर्गत अलग-अलग स्थानों पर बने मुख्य वितरण टैंकों तक डाली गई पाइप लाइनों में पानी पहुंचाने की कवायद शुरुरू हो गई है।
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धौलादेवी ब्लॉक के सैकड़ों गांव लंबे समय से पेयजल संकट ग्रस्त हैं। समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्षेत्रवासियों ने पहली बार 1977 में तत्कालीन पर्वतीय विकास मंत्री स्व. सोबन सिंह जीना को सरयू पंपिंग पेयजल योजना निर्माण का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उप्र में रहते बात आगे नहीं बढ़ पाई। 2000 में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद लोगों ने इस मांग को जोर शोर से उठाया। 2003 में द्वाराहाट के विधायक विपिन त्रिपाठी ने इस मामले को विधानसभा में उठाया। सरकार ने क्षेत्र में पानी का संकट होने की बात स्वीकार करते हुए समस्या हल करने का आश्वासन दिया। इसके बाद कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के नैनीताल में हुए सम्मेलन में उत्तराखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से सरयू-दन्यां-बेलक पेयजल योजना की घोषणा करवाई और योजना के लिए बजट का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा। 

कुछ महीनों बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हरिद्वार में हुई एक जनसभा में कुछ अन्य योजनाओं के साथ सरयू-बेलक योजना के लिए भी बजट देने की घोषणा की। 2012 में प्रदेश में कांग्रेस सरकार बनने के बाद जागेश्वर के विधायक और विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने पंपिंग योजना निर्माण के लिए सशक्त पैरवी की। उनके प्रयासों से पंपिंग योजना के लिए प्रदेश के वित्त विभाग ने 2013 में बजट मंजूर किया और काम में तेजी आई। करीब तीन साल से निर्माणाधीन यह योजना अब तैयार हो गई है। जल निगम ने पंप स्टेशनों से मुख्य टैंकों तक पानी चलाने की कवायद शुरू कर दी है। अब मुख्य टैंकों तक पानी पहुंचने लगा है। अगले कुछ महीने तक टेस्टिंग का काम जारी रहेगा। सब कुछ ठीक ठाक रहा तो गर्मियों के सीजन में 200 से अधिक गांवों में पानी पहुंचने लगेगा। 
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