रानीखेत (अल्मोड़ा)। ताड़ीखेत विकासखंड के उपराड़ी गांव में स्थित प्राचीन नौला संकट में है। वर्षों से कई ग्रामसभाओं की प्यास बुझाते आया यह पारंपरिक जलस्रोत अब दूषित हो गया है। ग्रामीणों ने जल्द नौले के संरक्षण के कदम उठाने की मांग प्रशासन व जल संस्थान से की है। जांच के लिए नौले के पानी का सैंपल ले लिया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि उपराड़ी ग्रामसभा का यह नौला सालों से उनका प्रमुख जलस्रोत रहा है। गर्मियों में जब बांकी जलस्रोत सूख जाते हैं, तब यही नौला लोगों की प्यास बुझाता है, लेकिन अब इसका पानी गंदा और बदबूदार हो गया है। पूर्व ग्राम प्रधान व सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बिष्ट ने बताया कि नौले का पानी अब पीने योग्य नहीं रहा, जिससे जलजनित बीमारियों का खतरा बना हुआ है।
उन्होंने बताया कि न सिर्फ उपराड़ी, बल्कि जैनोली, पिलखोली और आसपास के गांवों के लोग भी इसी नौले पर आश्रित हैं। दूषित पानी की सूचना मिलने के बाद जल संस्थान की टीम ने मौके पर पहुंचकर पानी का सैंपल जांच के लिए सुरक्षित कर लिया है।