ऐतिहासिक स्याल्दे बिखोती मेले का समापन रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुआ। विद्यालयी बच्चों ने देर रात तक कार्यक्रमों के माध्यम से समा बांध दिया। लोकगीतों और नृत्यों पर दर्शक देर रात तक झूमते रहे। इस दौरान झांकी प्रतियोगिताओं में अव्वल रहे विद्यालयी बच्चों को पूर्व प्रमुख राजेंद्र किरौला की तरफ से सम्मानित भी किया गया।
सरस्वती शिशु मंदिर, विवेकानंद विद्या मंदिर, दूनागिरि माडर्न स्कूल के बच्चों ने देर रात तक कार्यक्रमों के माध्यम से दर्शकों को बांधे रखा। इस दौरान कुमाऊंनी, गढ़वाली लोकगीतों और नृत्यों ने समा बांध दिया। इस दौरान बटपुजै मेले के दिन निकली झांकी प्रतियोगिता के पुरस्कार वितरित किए गए।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजेंद्र किरौला ने प्रथम स्थान पर रहने वाले दूनागिरि माडर्न जूनियर हाइस्कूल को पांच हजार, विवेकांनद विद्या मंदिर को दूसरे स्थान के लिए तीन हजार और तृतीय स्थान पर रहने वाली सरस्वती शिशु मंदिर की झांकी को दो हजार रुपये का नकद पुरस्कार प्रदान किया। मेले को सफल बनाने के लिए आल, नौज्यूला, गरख धड़ों के ग्रामीणों के अलावा सभी जनप्रतिनिधियों का आभार जताया गया।
मेला समिति सचिव नारायण रावत ने कहा कि संसाधनों की कमी के बावजूद मेले का सफल आयोजन हुआ है। मेला कमेटी की अध्यक्ष विमला शाह ने सभी का आभार जताया। संचालन शेरा भाई ने किया। इस दौरान हेम रावत, डॉ. तारा लाल शाह, विनोद जोशी, तारा सिंह मेहरा, गोविंद बिष्ट सहित तमाम लोग मौजूद थे।
मीना बाजार में दूसरे दिन भी की खरीदारी
स्याल्दे बिखोती मेले के तहत दूसरे दिन भी मीना बाजार सजी रही। महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। घरेलू सामान और सौंदर्य प्रसाधन जैसी सामग्रियों को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखा गया। झूले, चरखों को लेकर भी बच्चे उत्साहित दिखे। मंगलवार अपराह्न तूफान के चलते वहां अफरातफरी मच गई।
टीम के मेले में नहीं पहुंचने पर नाराजगी
स्याल्दे बिखोती मेला समिति की अध्यक्ष विमला शाह ने इस बार सांस्कृतिक विभाग की एक टीम के मेले में नहीं पहुंचने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि चयनित तीन टीमों में से कुल दो टीमों ने ही कार्यक्रम पेश किए, जबकि 16 अप्रैल की रात मल्लिका लोक कला केंद्र हल्द्वानी की टीम नहीं पहुंची, जिसके चलते दर्शक निराश हो गए।