अल्मोड़ा। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के अधिशासी निदेशक (फाइनेंस) हीराबल्लभ जोशी ने कहा कि जनता की सहभागिता के बिना खेलों को बढ़ावा नहीं मिल सकता। विदेशों से सीख लेकर भारत की जनता को भी इसके लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूल, कॉलेजों में जिन खेलों के लिए सुविधाएं और संभावनाएं हैं, यदि ऐसे संस्थान प्रस्ताव भेजते हैं तो साई इन संस्थानों को गोद लेकर वहां खेल सेंटर स्थापित करेगा।
जोशी ने यहां पत्रकारों को बताया कि खेल राज्य का विषय है। साई राज्यों और जनता से तालमेल बनाकर राज्य में खेलों को बढ़ावा देगा। साई के देश में 90 सेंटर हैं। अल्मोड़ा में बैडमिंटन, देहरादून में टीटी, प्रेमा साह जगाती स्कूल नैनीताल में ताइक्वांडो सेंटर चल रहा है। देहरादून में पहले से चल रहे टीटी सेंटर में अन्य खेलों का भी प्रशिक्षण जल्द मिलेगा। देवीधूरा में वॉलीबाल सेंटर समेत पौड़ी गढ़वाल में नया सेंटर खोलने की साई की योजना है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में 2018 में प्रस्तावित राष्ट्रीय खेल यहां सुविधाओं के विकास में महत्वपूर्ण साबित होंगे। प्रशिक्षित कोचों की तैनाती से ही खेलों को बढ़ावा मिलेगा। उत्तराखंड में खेल के क्षेत्र में समस्याएं और खूबी दोनों हैं। समस्या यह है कि यहां खेल गतिविधियों के लिए समतल जगह नहीं मिल पाती। बड़े कोर्ट और मैदान नहीं बन पाते। बच्चे घरों में ही रहते हैं। खेल संस्कृति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। बच्चों को छोटे-छोटे मैदान में खेलने के लिए प्रेरित करना होगा।
खूबी यह है कि उत्तराखंड दिल्ली के पास है। पर्वतीय क्षेत्र की जलवायु यहां के खिलाड़ियों का प्लस प्वाइंट है। जलवायु से यहां के खिलाड़ियों को जेनेटिक रूप से स्ट्रांग बनाती हैं। अन्य क्षेत्रों के खिलाड़ियों के मुकाबले यहां के खिलाड़ियों का स्टेमिना अधिक है। उत्तराखंड के खिलाड़ी सीमित संख्या में खेलते हैं और उनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन का प्रतिशत काफी अधिक है। सरकार के साथ ही खेलों को बढ़ावा देने के लिए जनता को भी प्रयास करने होंगे। खेल गतिविधियां अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाती हैं।
उन्होंने कहा कि देश में कई स्थानों पर तो खिलाड़ियों के अभिभावक ही उनके कोच हैं जो पूरा जीवन बच्चों के लिए समर्पित कर देते हैं। इससे पहले अल्मोड़ा पहुंचने पर उत्तराखंड बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव बीएस मनकोटी, साई के कोच डीके सेन, दीपक वर्मा, एनएस रावत, कमल गुप्ता, रमेश खडगवाल आदि ने जोशी का स्वागत किया।
अल्मोड़ा। साई के अधिशासी निदेशक (फाइनेंस) हीराबल्लभ जोशी चंपावत जिले के देवीधूरा के पास क्वैरी गांव के मूल निवासी हैं। उनकी इंटर तक की शिक्षा जीआईसी देवीधूरा में हुई। इसके बाद उन्होंने डीएसबी परिसर नैनीताल से बीए किया। एमए की पढ़ाई के लिए जेएनयू दिल्ली में प्रवेश लिया और वहीं से एमफिल करने के बाद उनका सिविल सर्विसेज में चयन हुआ। जोशी पहले से ही कई खेल गतिविधियों से जुड़े रहे हैं।