अल्मोड़ा। पद्म विभूषण स्व. बीडी पांडे स्मृति समारोह समिति की ओर से उत्तराखंड सेवा निधि पर्यावरण शिक्षा संस्थान जाखनदेवी में दो दिनी उत्तराखंड विकास विमर्शशाला संवाद -2016 शुरू हो गई है। मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने कहा कि हिमालय बचाने के लिए बहुत संवेदनशील होकर सही नीतियां बनाएं जाने की जरूरत है। हिमालय बचाओ अभियान पर्वतीय राज्यों और पहाड़ी भूभागों के संरक्षण, विकास के लिए एक सोच विकसित करने का गंभीर मुद्दा है। इसके लिए हमें सही नीतियां बनाने वाली सरकारें चाहिए।
कुंजवाल ने कहा कि सही विकास करने वाली सरकारों के प्रतिनिधि को चुनने का काम जनता का है। अब वक्त आ गया है कि जनता सरकारों के लिए सही प्रतिनिधि का चुनाव करे। संवाद की जरुरत पर बल देते हुए कहा कि राजनीतिज्ञों को सही दिशा देने के लिए संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि न केवल हिमालय को बल्कि प्रदूषित होती राजनीति को बचना की भी जरूरत है। सही सोच, विचार वाले लोग राजनीति में आने चाहिए। इसके लिए जागरूकता जरूरी है।
अध्यक्षता करते हुए पालिकाध्यक्ष प्रकाश जोशी ने कहा कि आज अनियंत्रित, अनियंत्रित निर्माण कार्यों से हिमालय को खतरा पैदा हो रहा है। इस दिशा में पहाड़ी भागों में निर्माण की सही नीतियां बनाए जाने की जरूरत है। जीबी पंत हिमालय पर्यावरण विकास संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डीएस रावत, विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. अरुणव पटनायक ने हिमालयी परिदृश्य के संदर्भ में जल, जंगल, जमीन, प्रकृति, पर्यावरण को बचाने के लिए लोगों से आगे आने का आह्वान किया।
डॉ. शमशेर सिंह बिष्ट ने हिमालयी राज्यों के विकास, संरक्षण के लिए स्पष्ट नीति बनाने की वकालत की। पीसी तिवारी ने कहा कि हिमालय को संकट से उबारना है तो जल, जंगल, जमीन को बचाना होगा। पद्मश्री डॉ. ललित पांडे ने संवाद में आए सभी लोगों का स्वागत किया। संचालन संवाद के संपादक डॉ. रमेश चंद्र पांडे राजन ने किया।
अधिवक्ता मदन लाल साह, डॉ. जेसी दुर्गापाल, सभासद अशोक पांडे, आकांक्षा, हेमलता भट्ट, रेखा धस्माना, पुष्पा पुनेठा, प्रो. शेखर जोशी, डॉ. दयाकृष्ण कांडपाल, कमल जोशी, पुष्पा पुनेठा ने विचार रखे। पूर्व राज्य मंत्री केवल सती, सभासद अख्तर हुसैन, चंद्रशेखर सिराड़ी, डॉ. एनएस चौहान, आशा डिसूजा, आनंद ऐरी, तारा साह, डॉ. प्रयाग पंत, रंजन जोशी, उदय किरौला, लीला टम्टा, पुष्पा सती, लता तिवारी, शंकर पांडे, मीता उपाध्याय, डॉ. सुबोध पंत, अनुराधा पांडे आदि थे।