एसएसजे परिसर में वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘उल्लास’ में दूसरे दिन छात्र-छात्राओं ने शानदार रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी। मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एचएस धामी ने कहा कि सांस्कृतिक समारोह छात्र-छात्राओं के लिए कला प्रदर्शित करने के बेहतर मंच होते हैं। विद्यार्थी पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियों में शानदार प्रदर्शन कर विवि का नाम रोशन करें।
उन्होंने कहा शिक्षा सत्र का नियमित होना जरूरी है। देर से परीक्षाएं होने से परीक्षाफल आने में भी काफी वक्त लग जाता है। इससे अन्यत्र संस्थानों में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं प्रवेश से वंचित रह जाते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं द्वारा दी जा रही रंगारंग प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि लोक विधा संस्कृति की वाहक है। इसको बेहतर और समृद्ध बनाने में युवाओं की अहम् भागीदारी है। विद्यार्थी पढ़ाई के साथ ही सभी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करें। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने झोड़ा, चांचरी और छपेली की अद्भुत प्रस्तुति दी। ‘लाली हौसिया बाना तिलै धारो बोला...’ पर खूब वाहवाही लूटी।
इस मौके पर परिसर निदेशक प्रो. आरएस पथनी, अधिष्ठाता छात्र कल्याण दया पंत, कुलानुशाक प्रो. जगत सिंह, प्रो. भीमा मनराल, लियाकत अली खान के अलावा सांस्कृतिक परिषद और छात्रसंघ पदाधिकारी मौजूद थे। समारोह के दूसरे दिन विभिन्न संकायों के कलाकारों ने लोकगीत और नृत्य, प्रहसन, नाटक आदि कार्यक्रम प्रस्तुत किए। छात्र-छात्राओं ने नृत्य, गायन और सुंदर अभिनय से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। कार्यक्रम को देखने को शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की काफी भीड़ थी। समारोह का संचालन डा. संजीव आर्या, डा. मेघा भारती, प्रो. अनिल जोशी ने किया।