अल्मोड़ा। जिले के आठ गांवों को रोजमेरी उत्पादन से नई पहचान मिलेगी, जिससे किसानों को आत्मनिर्भरता व बेहतर आय की उम्मीद है। जिला योजना के तहत दो हेक्टेयर क्षेत्र में 13 हजार रोजमेरी के पौधे रोपे गए हैं।
किसान प्रति हेक्टेयर 60 से 100 लीटर रोजमेरी तेल का उत्पादन कर आत्मनिर्भर बनेंगे। यह उन्हें वनजीवों से पारंपरिक खेती के नुकसान से भी मुक्ति दिलाएगी। उद्यान विभाग द्वाराहाट और हवालबाग के आठ गांवों (दुधोली, टोडरा, नायल, रथखाल, मल्ली रयूनी, कालिका बनोलिया, धामस, स्यूणा) के किसानों को रोजमेरी के कारोबार से जोड़ रहा है। आठ किसानों ने अपने खेतों में 13 हजार पौधे रोपे हैं। इस पर दो लाख रुपये खर्च हुए हैं। विभाग बेहतर उत्पादन के लिए तकनीकी प्रशिक्षण भी देगा। औषधीय और सुगंधित रोजमेरी की बाजार में खासी मांग है। इससे पारंपरिक खेती से बेहतर आय की उम्मीद है।
दो हेक्टेयर में लगाए हैं रोजमेरी के पौधों
विभाग के मुताबिक ने रोजमेरी के रोपे पौधे एक वर्ष में तैयार होंगे। तब किसानों हर साल इन पौधों से 2500 से 3000 किलो सूखी पत्तियां मिलेंगी। इससे लगभग 100 किलो तेल तैयार किया जाएगा। तेल को किसान तीन हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेच सकेंगे। ऐसे में किसानों को एक साल में प्रति हेक्टेयर छह लाख रुपये की आय होगी।
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औषधीय पौधे रोजमेरी के तेल के बाजार में काफी मांग है। किसान इसका तेल तैयार कर अच्छी आय कमा सकते हैं। योजना के तहत प्रथम चरण में आठ गांवों का चयन उत्पादन के लिए किया गया है
-डॉ. नरेंद्र कुमार, मुख्य उद्यान अधिकारी, अल्मोड़ा