सिमलगांव सहित 22 ग्रामसभाओं की बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा आदि समस्याओं को लेकर क्षेत्रवासियों ने रिस्कन घाटी संघर्ष समिति के बैनर तले धरना शुरू कर दिया है। वक्ताओं ने कहा कि संघर्ष के बिना द्वाराहाट का विकास नहीं हुआ है, इसीलिए सोमवार से क्रमिक अनशन किया जाएगा। यदि समस्याएं दूर नहीं हुई तो आमरण अनशन किया जाएगा।
ग्रामीण रविवार को सुनाड़ी में एकत्र हुए। यहां हुई सभा में रिस्कन घाटी संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था का हाल बुरा है। बिजली, पानी और सिंचाई की सुविधाएं भी नहीं है, जबकि इस बारे में कई बार शासन को ज्ञापन भेज चुके हैं। मगर आश्वासन पूरे नहीं हुए, जिसके चलते संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने समस्याओं के लिए एकजुट होने का संकल्प लिया।
उन्होंने स्वीकृत रिस्कना पुल से खलना, पैठानी, नैणी, सिमलगांव मोटर मार्ग निर्माण, कांडे-सुरईखेत-द्वाराहाट-ईड़ा मार्ग में हॉटमिक्स करने, बयेला-नाड़-फल्द्वाड़ी मोटर मार्ग का निर्माण, खलना-सुंआली, बेढुली पेयजल योजनाओं के पुनर्गठन, सिमलगांव में पशु चिकित्सक की नियुक्ति, बिमांडेश्वर बैराज का निर्माण कार्य पूरा कराने, एकल स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति, बिमांडेश्वर श्मशान स्थल पर शेड बनवाने, रिस्कन नदी में जल संवर्धन के लिए चेकडैम बनाने, सुअर, बंदर, तेंदुए से हो रहे नुकसान का मुआवजा देने मांग की।
सभा को जिला पंचायत सदस्य नीरज आर्या, पूर्व जिला पंचायत जगदीश बुधानी, दिनेश तिवारी, मोहन कांडपाल, राम दत्त, संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरवंश बिष्ट, विपिन पंत, मधुबाला कांडपाल, हरी सिंह जलाल ने संबोधित किया। विपिन पंत, आनंद पांडे, हिम्मत सिंह, लाल सिंह, मदन राम, महेश पंत, धर्मा देवी, नीरा देवी, शेर सिंह, नवीन कांडपाल, भगवती तिवारी, सुमन बिष्ट आदि ने धरना दिया।