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रिस्कन घाटी संघर्ष समिति ने पकड़ी आंदोलन की राह

Tue, 24 Mar 2015 11:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो,द्वाराहाट (अल्मोड़ा)
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 बिजली, पानी और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर रिस्कन घाटी संघर्ष समिति के बैनर तले ग्रामीणों का क्रमिक अनशन दूसरे दिन भी जारी रहा। दो लोग अनशन पर बैठे। जबकि दूर दराज के ग्रामीणों ने आंदोलन को समर्थन दिया। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक समस्याएं हल नहीं हो जाती तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने आरपार के संघर्ष का ऐलान किया है। 
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उन्होंने कांडे-सुरईखेत-द्वाराहाट-ईड़ा मार्ग में डामरीकरण करने, बयेला-नाड़-फल्द्वाड़ी मोटर मार्ग निर्माण की मांग की। उन्होंने कहा कि सड़कें न होने और खराब होने से लोगों को परेशानी हो रही है। इसके अलावा ग्रामीण खलना-सुंआली, बेढुली पेयजल योजनाओं का पुनर्गठन, सिमलगांव में पशु चिकित्सक की नियुक्ति, बिमांडेश्वर बैराज का तत्काल निर्माण कार्य पूरा करने, एकल अध्यापक वाले विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति, बिमांडेश्वर श्मशान स्थल पर विश्राम की व्यवस्था करने,  रिस्कन नदी में जल संवर्धन के लिए चेकडैम का निर्माण, सुअरों, बंदरों और तेंदुए से हो रहे नुकसान के मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
 दूसरे दिन पूर्व प्रधान रमेश पुजारी और नवीन कांडपाल क्रमिक अनशन पर बैठे। शांति देवी, सरस्वती देवी, मोहनी देवी, चंपा देवी, प्रेमा देवी, राधा देवी, कैलाश कांडपाल, जगदीश बुधानी आदि धरने पर बैठे। इस अवसर पर संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरवंश बिष्ट, उपाध्यक्ष जीवन सिंह, रमेश पुजारी, मधुबाला कांडपाल, हरी सिंह जलाल, शेर सिंह, विपिन पंत आदि भी मौजूद थे।
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