अल्मोड़ा। जिले के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों को मिलने वाले मध्याह्न भोजन के लिए चावल की पूर्ण आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे कई स्कूलों में भोजन व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। मध्याह्न भोजन के लिए शिक्षकों को चावल का वैकल्पिक इंतजाम करना पड़ रहा है।
अल्मोड़ा जिले में 1195 प्राथमिक और 464 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना संचालित है। यह योजना बच्चों के पोषण का अहम आधार है। विद्यालयों में अध्ययनरत 27,519 बच्चों को इसका लाभ मिलता है। बावजूद इसके विद्यालयों के लिए चावल की पूर्ण आपूर्ति नहीं हो पा रही है। विभाग के मुताबिक जिले में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के लिए मानकों के अनुसार प्रतिमाह लगभग 70 मैट्रिक टन चावल की आवश्यकता होती है। बावजूद इसके शिक्षा विभाग को जनवरी में 39.48 मैट्रिक टन चावल की ही आपूर्ति हो सकी। इसके अलावा फरवरी में भी अब तक 39.61 मैट्रिक टन चावल की आपूर्ति हुई है। इससे कई स्कूलों में भोजन व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। मध्याह्न भोजन के लिए शिक्षकों को चावल के वैकल्पिक इंतजाम करने पड़ रहे हैं। संवाद
शिक्षक उधार चावल खरीदकर बच्चों को खिला रहे हैं मध्याह्न भोजन
अल्मोड़ा। चावल की कमी के कारण कई विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना का संचालन प्रभावित हो रहा है। शिक्षक किसी तरह बच्चों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। द्वाराहाट ब्लॉक के राजकीय कन्या प्राथमिक विद्यालय मल्ली मिरई के प्रधानाध्यापक डॉ. दीपक मेहता ने बताया कि उनके विद्यालय में 32 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। मानकों के अनुसार विद्यालय को प्रतिमाह लगभग 85 किलो चावल की आवश्यकता होती है लेकिन दिसंबर से फरवरी तक केवल 50 किलो चावल ही उपलब्ध कराया गया। वर्तमान में विद्यालय के नाम पर 50 किलो चावल उधार चल रहा है। संवाद
वर्जन :
बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुसार मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। चावल की आपूर्ति में आई दिक्कत को दूर करने के लिए संबंधित विभाग से समन्वय किया जा रहा है। जल्द ही नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। - एचआर कोहली, मुख्य शिक्षा अधिकारी, अल्मोड़ा
-शिक्षा विभाग की ओर से जिस आधार पर डिमांड की लिस्ट जारी की जाती है। उस आधार पर चावलों को दिया जाता है। फरवरी में भी दे दिया गया है। - करुणा पंत, जिला पूर्ति अधिकारी अल्मोड़ा
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