राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने उद्यान और कृषि विभाग के एकीकरण के फैसले का विरोध किया है। पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य की भौगोलिक परिस्थितयां फल उत्पादन के अत्यंत अनुकूल हैं, हर साल लाखों मीट्रिक टन फलों का उत्पादन होता है, किसानों की आर्थिक स्थित सुदृढ़ करने में उद्यान विभाग का अहम योगदान है। कहा कि एकीकरण करने के बजाए उद्यान विभाग के पुनर्गठित ढांचे को हिमाचल की तर्ज पर विकसित किया जाए।
उद्यान मंत्री को भेजे ज्ञापन में संयुक्त परिषद पदाधिकारियों का कहना है कि उद्यान विभाग पर्वतीय क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। फलों की निरंतर बढ़ती मांग के सापेक्ष आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए उद्यान विभाग के विस्तार की जरूरत है।
बागवानी को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाना चाहिए। कहा कि दोनों विभागों का एकीकरण करने के बजाए उद्यान विभाग के पुनर्गठित ढांचे को हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर विकसित किया जाए। यदि ऐसा होता है तो उद्यान विभाग प्रदेश का महत्वपूर्ण विभाग बन सकता है। अध्यक्ष ध्रुव चंद्र सिंह रौतेला का कहना है कि उद्यान एवं कृषि विभाग का एकीकरण होने से विभागों के कार्य अलग हो जाएंगे। कर्मियों की वरिष्ठता में अंतर आ जाएगा। ज्ञापन भेजने वालों में उपाध्यक्ष हरदयाल सिंह, मंत्री कुंदन सिंह बिष्ट, प्रमुख प्रवक्ता आरएस मनराल आदि शामिल हैं।