उत्तराखंड स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और उत्तराधिकारी संगठन की बैठक में वक्ताओं ने शासनादेश के बाद भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उत्तराधिकारियों को कुटुंब पेंशन नहीं मिलने पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराधिकारियों को अस्पतालों में दवाईयों के लिए लोकल पर्चेज का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है।
चौघानपाटा स्थित गांधी पार्क में हुई इस बैठक में पदाधिकारियों पदाधिकारियों ने कहा कि शासन द्वारा स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उत्तराधिकारियों को कुटुंब पेंशन देने के लिए शासनादेश जारी किया गया था। कई उत्तराधिकारियों ने अपने आवेदन संबंधित विभागों में जमा करा दिए थे लेकिन कई माह बाद भी उन्हें पेंशन नहीं मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता सेनानी परिवारों को कुटुंब पेंशन के लाभ से वंचित किया जा रहा है। संगठन के सचिव दीपक कुमार तिवारी ने कुटुंब पेंशन के लिए पात्र स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के उत्तराधिकारियों से आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन फार्म संबंधित विभाग में जमा करने का आह्वान किया।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी पीपी पांडे ने बताया कि उनके पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे और उन्हें केंद्रीय पेंशन मिलती थी। उनकी मौत के तीन साल बाद भी उनकी माता को पेंशन नहीं मिली है। इस मामले में संबंधित विभाग से कई बार संपर्क किया तो संतोष जनक जवाब नहीं मिल रहा है। इस मौके पर तय किया गया कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के उत्तराधिकारियों की समस्याओं को लेकर एक शिष्टमंडल शीघ्र जिलाधिकारी से मिलेगा। अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष कमलेश पांडे और संचालन संगठन मंत्री कैलाश वर्मा ने किया। बैठक में दीपक कुमार तिवारी, गणेश गोस्वामी, प्रकाश अधिकारी, शिवशंकर बोरा, किशोर बंगारी, भरत पांडे, बीएस रावत, भूपाल गैड़ा, पुष्कर पांडे, भूपाल रावत, यशवंत परिहार आदि मौजूद थे।