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सूखी गगास के सीने पर जल पंचायत में बच्चों ने लिया नदी के संरक्षण का संकल्प

Tue, 23 May 2017 10:51 PM IST
अल्मोड़ा़,अमर उजाला
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अल्मोड़ा जिले के सोलना ओर हथौरा गांव के बीच सूखी हुई गगास नदी पर बैठ कर किशोर और युवाओं के साथ पहली जल पंचायत करते और संकल्प दिलाते जल पुरुष राजेंद्र। - फोटो : अमर उजाला
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 सदाबहानी रही गगास के संवर्द्धन को लेकर अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पदयात्रा के दृसरे दिन सूखी गगास नदी की छाती पर बैठकर जल पंचायत की गई। जलपुरुष राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई किशोर-किशोरियों की जल पंचायत में तीन प्रस्ताव पारित किए गए। किशोर किशोरियों ने गगास नदी को नजदीक से देखा, उसे समझा और सहेजने और संवारने का संकल्प लिया। किशोर पंचायत आस पास के तमाम गांव के बड़े-बूढ़ों के लिए एक चुनौती की तरह रही क्योंकि जिस काम को बड़े- बूढे़ नहीं कर पाए,  उस काम को किशोर और किशोरियों ने कर दिखाया।      
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित पहले चरण की पदयात्रा का समापन मंगलवार को यहां नौलाकोट में हुआ। जल पुरुष राजेंद्र सिंह की उपस्थिति में हुई पंचायत में बच्चों ने जंगल की आग बुझाने, गगास के संवर्द्धन के लिए बांज और उतीस के पेड़ लगाने और नदी के सहायक गधेरों को रिचार्ज करने के लिए वहां चाल-खाल (खाव) बनाने का प्रस्ताव पास किया और इस आशय का संकल्प लिया। जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि गगास नदी को बचाने के लिए ग्रामीणों को स्वयं जिम्मेदारी लेनी होगी। जब तक ग्रामीणों का जल, जंगल, जमीन से जुड़ाव नहीं होगा, तब तक संकल्प पूरा नहीं होगा। उन्होंने राजस्थान में नदियों को बचाने के लिए हुए संघर्ष की यादें भी ताजा कीं। 

नदी के संवर्द्धन को लेकर दूसरे दिन की पदयात्रा बुड्ढा सुरना से आरंभ हुई। कई गांवों में जनजागरण करने के बाद नौलाकोट में संवाद कार्यक्रम हुए और पानी पंचायत का आयोजन किया गया। जलपुरुष राजेंद्र सिंह ने किशोर- किशोरियों को नदी बचाने के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि भारत में बहने वाली हर नदी गंगा मां है। जब नदियां हैं तभी जीवन भी है। नदियों की सुरक्षा का जिम्मा भी लोगों पर ही है। उनके निर्देशन में किशोर, किशोरियों ने संकल्प लिया कि वह जंगल की आग बुझाने में सहयोग करेंगे, सूख रहे गधेरों को बचाने के लिए चाल-खाल बनाएंगे। नदी के संवर्द्धन के लिए बांज और उतीस के पेड़ लगाएंगे। 
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जल पुरुष ने अमर उजाला के अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि चीड़ के पेड़ों को धीरे-धीरे कम किया जा सकता है। इनकी जगह बांज और उतीस के पौध रोपने होंगे। पहाड़ की जवानी, किसानी और पानी तीनों खत्म हो रही हैं, इसे रोकने के लिए लोगों को स्वयं आगे आना होगा। उन्होंने राजस्थान में सात नदियों को पुनर्जीवित करने की कहानी बताई। कहा कि उन पर मुकदमे हुए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने फसल चक्र और मौसम चक्र को समझकर कार्य करने पर जोर दिया। 

भतौरा में महिला मंगल दल अध्यक्ष पार्वती रावत ने महिलाओं के सहयोग से चाल-खाल बनाकर पानी रोकने की मुहिम शुरू करने का संकल्प जताया। महिलाओं के साथ-साथ जीआईसी बिंता के एनसीसी और एनएसएस कैडेटों ने सूख चुके खालों को पुन: खुदवाने में सहयोग करने का आश्वासन दिया। प्रधानाचार्य जगमोहन पांडेय ने इसके लिए बच्चों को सुविधाएं मुहैया कराने का आश्वासन दिया। पदयात्रा का समापन नौलाकोट पंचायत घर में हुआ। समारोह की अध्यक्षता प्रधान कमला बोरा ने की। प्रधान सहित महिलाओं और पुरुषों ने नदी को बचाने के लिए संकल्पित रहने का आश्वासन दिया। नाथ सिंह बोरा के विचारों पर सहमति जताई। तय हुआ कि गधेरों के ऊपर चाल-खाल बनाए जाएंगे। इस मौके पर नौलाकोट प्रधान कमला बोरा, रवाड़ी प्रधान भुवन नाथ गोस्वामी, सरपंच मुकेश तिवारी, सुनील तिवारी, हरीश बोरा, नाथू सिंह बोरा, ललित मोहन सिंह नेगी, नंदन सिंह बोरा, मनोहर जोशी, मोहन कांडपाल, महेश कैड़ा, हरीश जोशी, पूरन कैड़ा, जीवन सिंह कृपाल सिंह, दुर्गा बोरा, भारती बिष्ट, आशा देवी सहित तमाम लोग मौजूद थे।
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