चिलियानौला में बिखरी पड़ी गंदगी।
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कूड़ा फैलाने वाले लोग जागरूक लोगों की मेहनत पर पानी फेर दे रहे हैं। घोषित नगर पालिका चिलियानौला क्षेत्र में लोग कूड़े के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक नहीं हो पा रहे हैं। कस्बों के नाले कूड़े से पटे पड़े हैं, यहां-वहां बिखरे कूड़े से वातावरण दूषित हो रहा है। संक्रामक रोगों के पनपने की आशंका बनी हुई है। व्यवस्था नहीं होने के कारण कई व्यापारी सुबह स्वयं कूड़े का निस्तारण करते हैं, लेकिन कुछ लोग उनकी मेहनत पर पानी फेरने का कार्य कर रहे हैं।
मालूम हो कि चिलियानौला कस्बा पूर्व में बधाण ग्राम सभा का हिस्सा था, दो साल पूर्व सरकार ने इसे नगर पालिका बनाया है, हालांकि पालिका अभी अस्तित्व में नहीं आई है, ग्रामीण क्षेत्रों में कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां बेतरतीब कूड़ा बिखरा रहता है। पूर्व में बीडीसी मद से कस्बे में स्थापित किए गए सीमेंट के कूड़ेदान तो लगाए गए, लेकिन निस्तारण की व्यवस्था नहीं है, हालांकि कस्बे के कई व्यापारी स्वयं कूड़े का निस्तारण करते हैं, लेकिन लोग उनकी मेहनत पर पानी फेर दे रहे हैं। कस्बे के नाले कूड़े से पटे पड़े हैं, लोग घरों का कूड़ा नालों में डाल रहे हैं, रही सही कसर बंदर पूरी कर दे हैं। लोग इन कूड़ेदानों का प्रयोग करने के बजाए नालों में गंदगी गिरा देते हैं।
कूड़े की दुर्गंध से जीना मुहाल हो रहा है। मालूम हो कि पूर्व में बधाण संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों ने श्रमदान कर कूड़ा निस्तारण किया और बेतरतीब कूड़ा फैलाने वालों के खिलाफ 500 रुपये जुर्माना ठोकने की भी योजना बनाई, एक दो लोगों को जुर्माना हुआ, लेकिन इसके बाद स्थिति जस की तस बनी हुई है। कूड़े के दुष्परिणामों से नागरिकों को स्वयं जागरूक होने की जरूरत है।