द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड में अनेक पौराणिक एवं सिद्ध शक्तिपीठ हैं। उन्हीं शक्तिपीठों में से एक है द्रोणागिरि वैष्णवी शक्तिपीठ। बताया जाता है कि वैष्णो देवी के बाद उत्तराखंड के कुमाऊं में दूनागिरि दूसरी वैष्णो शक्तिपीठ है। हिमालयन गजेटियर में भी दूनागिरि को ही प्राचीन द्रोणागिरी पर्वत माना है। मंदिर में श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा है। प्रत्येक दिन यहां श्रद्धालुुओं का तांता लगा रहता है। मंदिर ट्रस्ट पर श्रद्धालुुओं के लिए प्रतिदिन भंडारे की व्यवस्था करता है।
पर्यटन नगरी रानीखेत से 40, द्वाराहाट से 14 किमी दूर कर्णप्रयाग मोटर मार्ग पर स्थित दूनागिरि मंदिर सड़क से 800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। वहां जाने के लिए मंगलीखान तक वाहनों पहुंचते हैं। फिर डेढ़ किमी की चढ़ाई पार करनी पड़ती है। यहां करीब 500 सीढ़ियां पार करनी पड़ती है। मंदिर से हिमालय श्रंखलाओं के भव्य दर्शन होते हैं। मान्यता है कि राम-रावण युद्ध के वक्त के समय जब लक्ष्मण को मूर्च्छा लगी थी, तब संजीवनी बूटी की तलाश में हनुमान द्रोणागिरि पर्वत को ही उठा ले गए थे।
तब से ही इसे दूनागिरि के नाम से जाना जाता है। यहां विभिन्न प्रकार की जीवनदायिनी जड़ी, बूटियां भी मिलती हैं। वर्षभर देश, विदेश के सैकड़ों सैलानी पहुंचते हैं। योग, अध्यात्म के लिए भी यह स्थल काफी उपयुक्त है। आदि शक्ति मां दूनागिरि मंदिर ट्रस्ट भी व्यवस्थाओं को सही ढंग से निभा रहा है। नियमित भंडारे की व्यवस्था भी होती है। निरंतर मंदिर के विकास कार्य चल रहे हैं। नवरात्र शुरू हो गए हैं, श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला भी चल पड़ा है।
रानीखेत (अल्मोड़ा)। चैत्र की पहली नवरात्र पर नगर के विभिन्न मंदिरों में पूजा, अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। नगर के शिव मंदिर, झूलादेवी मंदिर, कालिका, चिलियानौला शिव मंदिर, हरड़ा देवी मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुुओं का तांता लगा रहा। लोगों ने व्रत धारण कर देवी मां की पूजा, अर्चना की।
फोटो: 08आरकेटी 07पी: दूनागिरि शक्तिपीठ मंदिर।