सोमवार को शुरू हुआ सियासी घमासान दूसरे दिन भी जारी रहा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर अराजकता का आरोप लगाते हुए नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट समर्थकों के साथ मंगलवार सुबह तहसील मुख्यालय पर धरने पर बैठ गए। तभी कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंच गए। उन्होंने काले झंडे लहराते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। गेट के अंदर घुसने का प्रयास कर रहे कार्यकर्ताओं की पुलिस से धक्कामुक्की हुई।
धरने पर बैठे नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर जमकर प्रहार किए। मुख्यमंत्री हरीश रावत पर कार्यकर्ताओं को दबंगई का लाइसेंस देने का आरोप मढ़ा। कहा कि अराजकता करने वाले कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ वह एफआईआर दर्ज कराएंगे। एफआरएच परिसर में हुए घटनाक्रम के बाद मंगलवार की सुबह नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने एसडीएम कार्यालय प्रांगण में समर्थकों के साथ धरना शुरू कर दिया। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष पर विस अध्यक्ष के खिलाफ अभद्र टिप्पणी का आरोप लगाते हुए कांग्रेसी कार्यकर्ता काले झंडे लेकर जुलस प्रदर्शन करते हुए कार्यालय आ धमके।
भारी संख्या में आए कार्यकर्ताओं को देखकर पुलिस प्रशासन के हाथ पांव फूल गए। नानीसार से पीएसी की प्लाटून मंगा ली गई। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने गेट के अंदर घुसने का प्रयास किया, पुलिस के साथ धक्कामुक्की तक हुई। बाद में वहां से चले गए।
इसके बाद भाजपा का धरना फिर शुरू हुआ। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री हरीश रावत पूरी तरह से अराजकता पर उतर आए हैं। विधायकों की खरीद फरोख्त कर फ्लोर टेस्ट जीतने वाले रावत अब फिर से सत्ता मद में चूर हैं और कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्रदेश में दबंगई करा रहे हैं। अराजकता करने वाले कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ वह एफआईआर दर्ज कराएंगे।
इस दौरान जिलाध्यक्ष अनिल शाही, मोहन नेगी, राजेंद्र जसवाल, विमल भट्ट, पुष्पा भट्ट, रोहित शर्मा, दर्शन बिष्ट, कुंदन लटवाल, धन सिंह बिष्ट, ज्योति शाह मिश्रा, धर्मेंद्र अधिकारी, प्रदीप बिष्ट, हंसादत्त बवाड़ी, चंदन भगत सहित दर्जनों भाजपाई मौजूद थे।
फूले पुलिस प्रशासन के हाथ पांव
रानीखेत। बवाल को देखते हुए दूसरे दिन भी पुलिस, प्रशासन और पीएसी के जवान एसडीएम कार्यालय परिसर में सुबह से ही तैनात रहे। सुबह कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ धक्कामुक्की के बाद एक बार फिर से टकराव की आशंका बढ़ने लगी थी, हालांकि मामला किसी तरह शांत हो गया।