यहां हजरत कालू सैय्यद बाबा की मजार पर 43 वां उर्स समारोह तकरीर, कुरानख्वानी और मुशायरा कवि सम्मेलन के साथ शुरू हुआ। स्थानीय और बाहर से आए कवियों ने कविताओं के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों पर कटाक्ष किए। इससे पहले तकरीर और कुरानख्वानी का आयोजन किया गया।
लोगों ने बाबा की मजार पर कुरानख्वानी का पाठ किया। उर्स के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। मस्जिद परिसर को चारों तरफ से शानदार ढंग से सजाया गया है। बाहर से आए व्यापारियों ने दुकानें सजा दी हैं। खादिम मो. मोहसिन ने बताया कि कल 18 मई को जनता की तरफ से बाबा की मजार पर सामूहिक चादर चढ़ाई जाएगी। चादर को यहां गुलजार मंजिल से कव्वाली गाते हुए लाया जाएगा।
इसके अलावा लोग व्यक्तिगत चादरें भी बाबा की मजार पर चढ़ाएंगे। मालूम हो कि चार दिवसीय उर्स समारोह में सभी समुदाय के लोग बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। 19 मई की रात नौ बजे से कव्वाली गायन शुरू होगा। इसके अलावा नातिया कलाम भी पेश किया जाएगा। 20 मई को भी रातभर कव्वाली गाई जाएंगी, जबकि 21 मई को सुबह छह बजे कुल शरीफ के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।