रानीखेत (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड की सबसे बड़ी कैंट के रूप में शुमार रानीखेत कैंट बोर्ड का कार्यकाल भी बुधवार की शाम खत्म हो गया है। यहां उपाध्यक्ष सहित सातों सभासद अब निवर्तमान हो गए हैं। बोर्ड की कमान अब केआरसी कमांडेंट बोर्ड अध्यक्ष तथा सीईओ के हाथ में आ गई है। जनता की तरफ से नुमाइंदगी का प्रस्ताव बोर्ड के माध्यम से शीघ्र ही रक्षा मंत्रालय को भेजा जाएगा। बता दें कि कैंट एक्ट में संशोधन को लेकर 2003 में भी बोर्ड की कमान वैरी बोर्ड के हाथ में आ गई थी।
रानीखेत कैंट उत्तराखंड की सबसे बड़ी कैंट के रूप में जानी जाती है। यहां छावनी क्षेत्र में सात वार्ड स्थापित किए गए हैं। बुधवार की शाम कैंट बोर्ड का कार्यकाल खत्म हो गया है। अब कमान वैरी बोर्ड के हाथ में आ गई है। फिलहाल अध्यक्ष कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र के कमांडेंट आईएस साम्याल और बोर्ड के सीईओ अभिषेक आजाद बोर्ड का कामकाज देखेंगे। जनता की तरफ से नुमाइंदगी के लिए बोर्ड की तरफ से रक्षा मंत्रालय को नामों का पैनल भेजा जाएगा। बोर्ड के पूर्व उपाध्क्ष मोहन नेगी ने बताया कि वैरी बोर्ड में तीन लोग शामिल होते हैं।
उन्होंने बताया कि 1997 में चुनाव हुए थे। 2003 बोर्ड वैरी हो गई थी। उस वक्त कैंट एक्ट 1924 में संशोधन होना था। तब कैंट एक्ट 2006 बना था। नया एक्ट बनने के बाद 2008 मई में चुनाव हुए थे। इस बार भी रक्षा मंत्रालय की तरफ से एक्ट में संशोधन होना है। लीज पॉलिसी, कैँट एक्ट में उपाध्यक्ष का चुनाव ओपन करने की योजना है। व्यापक संशोधन होने हैं। बता दें कि बोर्ड का कार्यकाल एक साल पहले समाप्त हो गया था, इसके बाद छह-छह माह के लिए दो बार कार्यकाल बढ़ाए गए थे।