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कोतवाली भवन खस्ताहाल

Mon, 02 Nov 2015 11:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अल्मोड़ा।
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108 साल पहले बना अल्मोड़ा कोतवाली का भवन और बैरक खस्ताहाल हैं। अंग्रेजों के समय में कोतवाली परिसर में स्थापित घुड़साल में अब मित्र पुलिस कर्मी रह रहे हैं। कोतवाली में तैनात करीब पांच दर्जन अधिकारी और पुलिस कर्मियों के कार्यालय कक्षों, आवास की भी कोई व्यवस्था नहीं है। इससे पुलिस कर्मियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
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ब्रिटिश राज में 1907 में अल्मोड़ा कोतवाली भवन बना है। तब से इसी भवन में कोतवाली चल रही है। बताया जाता है कि ब्रिटिश समय में करीब एक दर्जन पुलिस कर्मियों की तैनाती के मुताबिक कोतवाली परिसर में भवन और बैरेकों का निर्माण किया गया।

वर्तमान में कोतवाली में कार्मिकों की संख्या पांच गुना बढ़कर साठ पहुंच गई है। इसके अनुसार भवन का विस्तार नहीं हुआ है। पुराने जीर्ण-शीर्ण भवनों में ही थाना, कोतवाल आवास, बैरेक, रसोईघर संचालित हैं। भवन की छत बरसात में टपकती है।
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कोतवाली परिसर में मात्र थानाध्यक्ष के बैठने के लिए कार्यालय और रहने को आवास हैं, लेकिन उपनिरीक्षकों के बैठने के लिए कोई कार्यालय नहीं है। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। थाने में तैनात पुलिस कर्मियों के लिए बैरेक भी पर्याप्त नहीं हैं।

ब्रिटिशराज में कोतवाली परिसर में बनाई गई घुड़साल वर्तमान में कुछ ही मित्र पुलिस कर्मियों का आशियाना बना है। एक-एक कमरे वाले इस बैरक में भी सुविधाएं नहीं हैं। शौचालयों की स्थिति भी खराब है। छतें टपकती हैं। पर्याप्त आवास नहीं होने से अधिकांश पुलिस कर्मियों के लिए महंगे किराए के मकानों में रहना मजबूरी है। ऐसे में सरकार के मित्र पुलिस को पूर्ण सुविधा मुहैया कराने के दावे धरातल पर नहीं दिखाई दे रहे हैं।
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