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स्थायी रेडियोलॉजिस्ट के लिए जूझ रहा रानीखेत उपमंडल का सरकारी अस्पताल

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रानीखेत (अल्मोड़ा)। सरकार पहाड़ की स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लाख दावे करे, लेकिन हालात इससे जुदा हैं। रानीखेत उपमंडल क्षेत्र का सबसे बड़ा गोविंद सिंह माहरा राजकीय अस्पताल पिछले एक दशक से स्थायी रेडियोलॉजिस्ट के लिए तरस रहा है। बताया जा रहा है कि लॉक डाउन के बाद से यहां नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे, जिस कारण मरीज परेशान हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं को परेशानी हो रही है। अधिकतर लोग निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं। लोगों ने अब सीएम को ज्ञापन भेजकर आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
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बात दें की रानीखेत का राजकीय अस्पताल में उपमंडल क्षेत्र के प्रतिदिन तीन सौ से अधिक रोगी पहुंचते हैं। लोगों का कहना है कि रानीखेत में लॉकडाउन के बाद से नियमित अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहे हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य राजेंद्र सिंह बिष्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा है कि अस्पताल में तैनात रहे रेडियोलॉजिस्ट को कई साल पहले प्रोन्नति के बाद सीएमएस बना दिया गया। स्वास्थ्य विभाग रानीखेत जैसे नगर में जरूरी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं कर सका है। बिष्ट के अलावा कई अन्य ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को इस मामले में पत्र भेजकर यथाशीघ्र अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती की मांग की है। बात दें कि रानीखेत के सरकारी अस्पताल में भिकियासैण, सल्ट, स्याल्दे, द्वाराहाट, चौखुटिया के अलावा गैरसैंण के लोग भी उपचार को आते हैं। सीएम को पत्र देने वालों में बिष्ट के लावा प्रह्लाद सिंह, जवाहर सिंह, मोहित बिष्ट, जसवंत राम, दिनेश पांडे, करिश्मा बिष्ट, ललिता बिष्ट आदि शामिल थे।
अस्पताल में फिजिशियन तक नहीं
रानीखेत। उपमंडल का एकमात्र बड़े अस्पताल में पिछले डेढ़ साल से फिजिशियन तक नहीं है। एकमात्र फिजिशियन डॉ. आरके सागर का डेढ़ साल पहले स्थानांतरण कर दिया गया। कोरोनाकाल में रोगियों को अन्यत्र जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। उधर रानीखेत के विधायक करन महरा का कहना है कि डबल इंजन सरकार पूरी तरह से नाकाम हो गई है। स्थायी फिजिशियन, रेडियोलॉजिस्ट के लिए पिछले साल कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आंदोलन भी किया, मैंने विधानसभा में मामला उठाया, लेकिन सरकार की तंद्रा नहीं टूट रही। कोरोना निपटे तो जनता के साथ धरना दूंगा।
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स्थायी रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण दिक्कतें हैं। मैं स्वयं अल्ट्रासाउंड कर रहा हूं। अधीक्षक का दारोमदार भी है, कार्यालय संबंधी कई कार्य निपटाने होते हैं, प्रतिदिन सैकड़ों अल्ट्रासाउंड करता हूं, आपातकालीन केसों को कभी नहीं छोड़ता। शासन से लगातार स्थायी रेडियोलॉजिस्ट की मांग की जा रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
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डॉ. डीएस नेईं, अधीक्षक, रेडियोलॉजिस्ट, रानीखेत, राजकीय अस्पताल।
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