लोक झलक समारोह के बहाने पर्यटन नगरी की सड़कों पर मंगलवार देर शाम लोक संस्कृति की बयार बही। सांस्कृतिक शोभा यात्रा में एक तरफ लोक देवता लखिया भूत नाच रहे थे, तो दूसरी तरफ विभिन्न अंचलों के गीतों पर विद्यालयी बच्चे। यह सब देख रहे पर्यटक भी अपने कदम नहीं रोक पाए और बच्चों के साथ थिरकने लगे। इस पल का गवाह बनी क्षेत्र की जनता और भारी संख्या में पहुंचे सैलानी।
मंगलवार शाम नगर के गोविंद बल्लभ पार्क से विभिन्न विद्यालयों के बच्चों की सांस्कृतिक शोभा यात्रा शुरू हुई। यात्रा में नेशनल इंटर कॉलेज, केंद्रीय विद्यालय, जीजीआईसी सहित तमाम विद्यालयों के बच्चों ने शिरकत की। बच्चे अलग अलग टोलियों में झोड़ा, चांचरी, लोक गीत और लोक नृत्य करते हुए चल रहे थे। शोभा यात्रा को देखने के लिए भारी संख्या में पर्यटक पहुंचे थे।
देर शाम तक नगर में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम चलते रहे। कुमाऊंनी बारात के दृश्य ने भी सभी का मन मोह लिया। पर्यटक रंग बिरंगी पोशाकों से सजे बच्चों को कैमरे में कैद करने को आतुर दिख रहे थे। देर शाम सांस्कृतिक शोभा यात्रा आयोजन स्थल नरसिंह मैदान पहुंची। यहां भी कार्यक्रम हुए। समारोह को सहयोग करने के लिए भारी संख्या में रानीखेत नगर के लोग मौजूद थे। विद्यालीय बच्चों के कार्यक्रमों ने जमकर तालियां बटोरी।
पर्यटन नगरी में लोक झलक समारोह का रंगारंग आगाज हुआ। देर शाम मुख्य अतिथि डीएम सविन बंसल ने दीप जलाकर तीन दिनी समारोह का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि मेलों के माध्यम से जहां युवाओं को प्राचीन संस्कृति का बोध होता है, वहीं लोक संस्कृति का प्रचार प्रसार भी होता है। उन्होंने ग्रीष्मोत्सव के स्थगित होने के बावजूद इस तरह के आयोजन के लिए स्थानीय नागरिकों की सराहना की। शाम को कवि सम्मेलन का आगाज हुआ।
बता दें कि ग्रीष्मोत्सव के स्थगित होने से लोगों में मायूसी थी।
लेकिन, स्थानीय नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से लोक झलक समारोह के माध्यम से तीन दिनी कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इसका आगाज सांस्कृतिक शोभा यात्रा के साथ हुआ। अब आठ जून से विभिन्न वर्गों में अंतरविद्यालयी सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं होंगी। नौ और 10 जून को ऐंपण, फैंसी ड्रेस और व्यंजन प्रतियोगिताएं होंगी। 10 जून को ही पुरस्कार वितरण के साथ समारोह का समापन होगा। इधर, उद्घाटन अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, विभिन्न संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों के अलावा भारी संख्या में लोग मौजूद थे।