रानीखेत तहसील में प्रदर्शन के दौरान जेएम को ज्ञापन सौंपते पूर्व विधायक करन और कांग्रेस के लोग। स?
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत के रोडवेज डिपो का भवाली डिपो में विलय किए जाने के सरकार के फैसले के खिलाफ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूर्व विधायक करन माहरा के नेतृत्व में यहां संयुक्त मजिस्ट्रेट कार्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया और राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर इस जनविरोधी फैसले को वापस लेने की मांग की गई। ऐसा नहीं होने पर बाजार बंद और उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई। इधर, पहाड़ से लेकर तराई तक प्रदेश के अन्य जिलों में भी कई डिपो के विलय पर मंगलवार दिन भर प्रदर्शन हुआ। देर शाम शासन ने जन दबाव में विलय के आदेश को रद्द कर दिया।
पूर्व विधायक करन माहरा की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना प्रदर्शन किया। राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में कहा गया कि रानीखेत नगर ब्रिटिश काल से ही पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, सेना, कृषि और उद्यान के क्षेत्र में हमेशा ही पूरे पर्वतीय क्षेत्रों का नेतृत्व करता रहा है। लंबे समय से पूर्व में कई सरकारी संस्थानों का अन्यत्र स्थानांतरण कर रानीखेत के साथ हमेशा ही खिलवाड़ किया जाते रहा है। परिवहन निगम का डिपो रानीखेत की पहचान से जुड़ा है। इसके विलय का शासनादेश जारी होना रानीखेत के साथ अन्याय है। पूर्व विधायक करन माहरा ने कहा कि भाजपा सरकार ने हमेशा रानीखेत के साथ अन्याय किया।
भाजपा सरकार में ही पूर्व में यहां से दर्जनों कार्यालय अन्यत्र शिफ्ट कर दिए गए। यहां केआरसी का मुख्यालय है। भर्ती काल में रोडवेज डिपो की सहायता लेनी होती है। डिपो हटने से भर्ती युवकों को आवागमन में परेशानी होगी। गैरसैंण और बागेश्वर से लोग स्वास्थ लाभ के लिए रानीखेत आते हैं उनके लिए भी डिपो के हटने से समस्या खड़ी हो जाएगी। पर्यटन पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा। यहां ब्लाक प्रमुख हीरा रावत, पूर्व प्रमुख रचना रावत, जिलाध्यक्ष महेश आर्या, ब्लॉक अध्यक्ष गोपाल देव, पीसीसी सदस्य कैलाश पांडेय, नगर अध्यक्ष उमेश भट्ट, पंकज जोशी, बीडीसी अमित पांडेय, व्यापार मंडल महासचिव संदीप गोयल, उपाध्यक्ष दीपक पंत, चिलियानौला व्यापार मंडल अध्यक्ष कमलेश बोरा, उपसचिव विनीत चौरसिया सहित तमाम लोग मौजूद रहे।