स्याल्दे (अल्मोड़ा)। क्षेत्र में बाघ और तेंदुए के बढ़ते हमलों के विरोध में सोमवार को स्याल्दे तिराहे पर लोगों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी कर मानव-वन्यजीव संघर्ष पर आक्रोश जताया। इसके बाद तहसील पहुंचकर उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन में कहा गया कि उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बाघ और तेंदुए के हमलों से मानव जीवन संकट में है। स्याल्दे के बबलिया क्षेत्र में सुनीता पर हमला और सल्ट के डभरा-सौराल में 21 वर्षीय शालिनी नेगी की मौत का हवाला देते हुए कहा गया कि घटनाओं से ग्रामीणों में भय का माहौल है। लोग खेतों, जंगलों और रास्तों पर जाने से भी डर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, मानव जीवन के लिए खतरा बने वन्यजीवों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और मानव-वन्यजीव संघर्ष के स्थायी समाधान के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी केवल घटना के बाद मुआवजा देना नहीं है। मानव जीवन अमूल्य है, इसलिए मुआवजा नहीं बल्कि सुरक्षित जीवन चाहिए। साथ ही आंदोलनकारियों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने और वन विभाग की जवाबदेही तय करने की मांग की गई। इस दौरान राज्य आंदोलनकारी राजेंद्र नेगी, सुनील टम्टा, प्रताप आर्या, प्रकाश कोहली, मोहन राम आर्या, राकेश बिष्ट, दिनेश कोहली, नारायण सिंह रावत, बिशन दत्त शर्मा, राजू चौधरी, बालम पटवाल, आनंद तिरवा और गिरीश आर्या समेत दर्जनों लोग मौजूद रहे।