जागेश्वर धाम में अलाव जलाने को लेकर पुजारियों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) के बीच ठन गई है। पुजारियों का कहना है कि ठंड के मौसम में अंगीठी जलाई गई थी, जिसे एएसआई के अधिकारियों ने नदी में फिंकवा दिया। दूसरी ओर, एएसआई के अधिकारियों का कहना है कि नियमानुसार मंदिर परिसर में आग नहीं जलाई जानी चाहिए। इसलिए अंगीठी मंदिर परिसर से बाहर रखवाई गई।
एएसआई के पास जागेश्वर धाम के मंदिरों के संरक्षण की जिम्मेदारी है। शनिवार को एएसआई क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून के अधीक्षक डॉ. राजकुमार पटेल और अन्य अधिकारी जागेश्वर धाम पहुंचे थे। उन्होंने सुधारीकरण कार्य का जायजा लिया। एएसआई के क्षेत्रीय अधीक्षक डॉ. राज कुमार पटेल ने बताया कि महामृत्युंजय मंदिर के सामने पुजारी बड़ी अंगीठी में आग जलाते मिले, जिससे काफी धुआं उठ रहा था। इस पर उन्होंने पुजारियों से मंदिर परिसर के सामने आग नहीं जलाने को कहा। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में आग जलाना प्रतिबंधित है। धुएं से मंदिरों को नुकसान पहुंचेगा।
दूसरी ओर पुजारियों का कहना है कि मंदिर परिसर में काफी ठंड है। ठंड से बचने के लिए पूर्व से ही पुजारी मंदिर परिसर में आग जलाते आ रहे हैं। पुजारियों का आरोप है विभाग के कार्मिकों ने अंगीठी जटागंगा नदी में फेंक दी। पुजारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि एएसआई के अधिकारी मंदिर में जूते पहन कर आए थे, जबकि क्षेत्रीय अधीक्षक डा. पटेल का कहना है कि मंदिर परिसर में जूता स्टैंड बना है। वह पारिवारिक कारणों के चलते किसी भी मंदिर के भीतर नहीं गए। मंदिर परिसर के दूसरी ओर जटागंगा नदी में जाने के लिए उन्होंने जूते पहने थे। उन्होंने पुजारियों के अंगीठी को फिंकवाने के आरोप से इनकार करते हुए कहा कि अंगीठी को मंदिर परिसर के बाहर रखवाया गया।