सेराघाट क्षेत्र में आम के पेड़ पर समय पहले ही बौर आई।
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पौष माह में ही प्रकृति का बसंती चेहरा झलकने लगा है। सेराघाट क्षेत्र में फलों के राजा आम की बौर समय से पहले ही निकल आई है। जबकि अमूमन फरवरी के अंत या मार्च शुरू में ही बौर निकलती है। काश्तकार समय से पहले आम के पेड़ में बौर आने को शुभ संकेत नहीं मान रहे हैं।
सेराघाट क्षेत्र आम की फसल के लिए जाना जाता है। यहां के आम प्रदेेश भर में विख्यात हैं, लेकिन इस बार आम की फसल पर मौसम की मार पड़ी है। जलवायु परिवर्तन के कारण आम के पेड़ में बौर जनवरी में दिखाई देने लगी है। मालूम हो कि जनवरी में कड़ाके की ठंड होती है, लेकिन इस बार जनवरी में मार्च जैसी धूप खिली हुई है। अब तक आम के पेड़ों में बौर बसंत पंचमी के आसपास ही दिखाई पड़ती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। जिससे काश्तकार चिंता में हैं। देसी और कलमी आम के बगीचों से उम्मीद बांधे किसानों का मानना है कि समय से पहले बौर आने से रोग लगने और फसल उत्पादन घटने की संभावना से इंकार नही किया जा सकता है।
सेराघाट निवासी काश्तकार सुलेमान खान का कहना है कि उसके आम के पेड़ों में फरवरी में बौर आते थे लेकिन इस बार दिसंबर आखिरी हफ्ते से ही उसके आम के बगीचे में बौर दिखने लगी है। ऐसा नजारा उन्होंने साठ साल की उम्र में पहली बार देखा है। इसी तरह अन्य काश्तकार भी समय से पहले आम की बौर को शुभ संकेत नहीं मान रहे हैं। इधर जानकारी मिलने के बाद जिला उद्यान अधिकारी हितपाल सिंह चौधरी ने रविवार को उद्यान विभाग की टीम को सेराघाट भेजा। निरीक्षण के बाद उद्यान विभाग भैंसियाछाना इंचार्ज हरि मोहन उपाध्याय ने बताया कि बढ़ते तापमान से ऐसा परिवर्तन देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जमराड़ी नौगांव की नर्सरी में भी कई पेड़ों में बौर आ गई है।