रैमजे इंटर कालेज अल्मोड़ा में बैठक करते उत्तरांचल प्रधानाचार्य परिषद के पदाधिकारी।
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अल्मोड़ा। उत्तरांचल प्रधानाचार्य परिषद की जिला इकाई की हुई बैठक में अशासकीय स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और प्रधानाचार्यों की समस्याओं पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। बाद में 11 सूत्री मांगपत्र सीईओ के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजा।
रैमजे इंटर कॉलेज में हुई बैठक में उन्होंने कहा कि अक्तूबर 2011 में जारी अधिसूचना के तहत स्कूल में वरिष्ठ सहायक अध्यापक और प्रवक्ता को प्रधानाचार्य के पद पर पांच वर्ष सेवा करने पर प्रधानाचार्य पद का वेतन दिलाने की व्यवस्था की गई थी। मुख्यमंत्री से मांग की गई कि विधानसभा में इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर कानून बनाया जाए। उन्होंने कहा कि अधिनियम के तहत स्कूल के शिक्षक, कर्मचारी और प्रधानाचार्योें के पदों को भरने के लिए एक साथ विज्ञप्ति निकालने का प्राविधान है, लेकिन मात्र शिक्षकों के खाली पदों को भरने के लिए विज्ञप्ति निकाली जा रही है। आरोप लगाया कि शासन को समय पर सूचना न भेजने से अशासकीय स्कूलों को बजट आवंटन नहीं हो पा रहा है। इससे शिक्षकों और कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं रहा। तदर्थ सेवाओं का लाभ चयन, प्रोन्नति, पेंशन, ग्रेच्युटी में देने का शासनादेश जारी करने की मांग की। बैठक में अक्तूबर 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए भी पुरानी पेंशन बहाली पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजकीय शिक्षकों की तरह अशासकीय जूहा से समायोजित शिक्षकों प्रधानाध्यापकों की जूनियर हाईस्कूल की सेवा को जोड़ते हुए चयन और प्रोनत वेतमान मिले। अशासकीय स्कूलों के कार्मिकों को अटल आयुष्मान निशुल्क चिकित्सा योजना से भी जोड़ने की मांग की। बैठक में जिलाध्यक्ष हिमांशु तिवारी, जिला उपाध्यक्ष वीटी विल्सन, जिला मंत्री दीपक फुलोरिया, कोषाध्यक्ष केवल चंद्र टम्टा आदि थे।