सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी को जनप्रतिनिधियों से लेकर जन संगठन कई बार आंदोलन भी कर चुके हैं। हर बार सरकार व्यवस्थाओं में जल्द सुधार की ‘डोज’ पिला कर आंदोलन समाप्त करा देती है। अब शासन की मंशा जिला अस्पताल को पीपीपी मोड में देने की है। हालांकि पीपीपी मोड में पहले से संचालित अस्पतालों की व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। पीपीपी में संचालित चौखुटिया और लोहाघाट अस्पतालों की व्यवस्थाओं से वहां की जनता नाराज है।
जिला मुख्यालय अल्मोड़ा का जिला अस्पताल नगर के मध्य में स्थित है। प्रतिदिन यहां 300 से अधिक रोगी पहुंचते हैं। इसके अलावा बाहरी क्षेत्रों से 108 एंबुलेंस से लाए जाने वाले रोगियों की भी खासी तादात रहती है। अस्पताल में डाक्टरों के साथ ही जरूरी संसाधन नहीं होने से मरीजों को अच्छा इजाज नहीं मिल पाता है। बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए क्षेत्र के विधायक को भी आंदोलन करना पड़ा था। इसके अलावा जन स्वास्थ्य संघर्ष मोर्चा ने भी अस्पताल की सेवाओं में सुधार को लेकर लंबे समय तक मोर्चा खोला था। सरकार राज्य में डाक्टरों का अभाव बताते हुए शीघ्र ही सुधार की डोज कई बार आंदोलनकारियों को पिलाती रही, लेकिन व्यवस्था नहीं सुधरी। अब शासन गुपचुप तरीके से जिला अस्पताल को पीपीपी मोड में संचालित करने की तैयारी में है।
पिछले एक हफ्ते में दिल्ली, मेरठ और हल्द्वानी स्थित बड़े अस्पतालों के प्रबंधन कर्मियों ने अल्मोड़ा आकर जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी ली है। आशंका है कि शासन जल्द ही एमओयू कर जिला अस्पताल को निजी अस्पताल के हवाले कर देगा। सरकार भले ही व्यवस्थाओं में सुधार की मंशा से अस्पतालों को पीपीपी मोड में चलाना चाहती है, लेकिन इस बात की गारंटी नहीं है कि पीपीपी में संचालित अस्पतालों में जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलती हों। जिले के चौखुटिया और लोहाघाट के सीएचसी कुछ समय पहले से पीपीपी मोड में चल रहे हैं। इन अस्पतालों की व्यवस्थाओं को लेकर भी लोगों में नाराजगी है।