अल्मोड़ा। सत्र न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र शर्मा ने पांच मुकदमों में माओवादी पोस्टर लगाने के मामले के सभी चार आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया है। पुलिस न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत करने में असफल रही।
पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान तीन और चार मई 2014 को विभिन्न स्थानों पर माओवादी पोस्टर बनाने और चिपकाने, चुनाव बहिष्कार करने के आरोप में पुलिस और वन विभाग के अधिकारियों ने राजद्रोह और अन्य धाराओं में पाटिया गांव निवासी गोविंद राम, जगदीश राम, दीवान सिंह बिष्ट और अल्मोड़ा निवासी जीवन चंद्र को गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 153ए, 153बी, 124बी, 10/20 यूएपीए, लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम एवं लोक संपत्ति विरुपण अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। न्यायालय में सरकार की ओर से वन, राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकरियों और कर्मचारियों को गवाह के रूप में प्रस्तुत किया गया।
आरोपियों से बरामद दिखाए गए साहित्य और विभिन्न स्थानों पर लगाए गए पोस्टर के फोटोग्राफ और सीडी न्यायालय में पेश की गई। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता पीसी तिवारी और उनके सहयोगियों ने प्रभावी पैरवी की। सत्र न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और पत्रवाली में दर्ज बयानों का अध्ययन किया।
न्यायालय में अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असफल रहा। सत्र न्यायाधीश ने सभी मामलों में अलग-अलग फैसला देते हुए उन्हें निरस्त कर आरोपी गोविंद राम, जगदीश राम और जीवन चंद्र को दोषमुक्त करार दिया। इस मामले के एक अन्य आरोपी दीवान सिंह बिष्ट की मुकदमे के दौरान पूर्व में मृत्यु हो चुकी थी।