अल्मोड़ा। हवालबाग विकासखंड में अब औषधीय पौधे की खेती ग्रामीणों की तकदीर बदलेगी। यहां ग्रामीणों की 5.5 हेक्टेयर बंजर भूमि पर रोजमेरी, तेजपत्ता, तिमूर आदि औषधीय पौधे की खेती की जाएगी। पहले चरण में खूंट,धामस सहित छह गांवों के 400 से अधिक किसानों को योजना से जोड़ा जाएगा।
गोविंद बल्लभ पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान और मनरेगा के संयुक्त प्रयास से यह योजना तैयार की गई है। इस योजना को धरातल पर उतारने में 43.22 लाख रुपये खर्च होंगे। योजना के तहत किसानों को 15,516 दिन का रोजगार मिलेगा। फसल की बिक्री से भी वह अच्छी आमदनी कर सकेंगे। दूसरे चरण में 10 हेक्टेयर बंजर भूमि पर औषधीय पौधों की खेती की योजना बनायी गयी है।
संस्थान के वैज्ञानिक डाॅ. आशीष पांडे ने कहा कि क्षेत्र में चयनित कलस्टर में मिट्टी की तकनीकी जांच की गई है और भूमि औषधीय पौधे की खेती के लिए उपयुक्त है। कहा कि चयनित किसानों को खेती का प्रशिक्षण देकर उच्च गुणवत्ता के पौध उपलब्ध कराए जाएंगे और उन्हें समय-समय पर तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। पारंपरिक फसलों को जंगली जानवरों नष्ट कर रहे हैं। आयुर्वेदिक कंननियों की औषधीय पौधों की बढ़ती मांग के बाद यह प्रयोग किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों की बंजर भूमि रोजगार का माध्यम बनेगी तो क्षेत्र में पलायन पर भी रोक लगेगी।