अल्मोड़ा। सरकारों ने पहाड़ के दुर्गम स्थानों पर कई जगह पॉलीटेक्निक संस्थान तो खोल दिए लेकिन अब इनका सुधलेवा कोई नहीं है। शहीद मेजर कमलेश पांडे राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान बाड़ेछीना स्वीकृति के सात साल बाद भी जीआईसी बाड़ेछीना के आवासीय भवन में संचालित हो रहा है। पॉलीटेक्निक का अपना भवन न होने के कारण कई बार दिक्कतों का सामना भी करना पड़ता है।
तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए तत्कालीन सरकार ने वर्ष 2014 में बाड़ेछीना में शहीद मेजर कमलेश पांडे राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान स्वीकृत किया था। स्वीकृति के समय से ही यह संस्थान जीआईसी बाड़ेछीना के आवासीय भवन में संचालित हो रहा है। पॉलीटेक्निक खुलने के सात सालों बाद भी संस्थान का अपना भवन नहीं बना है। संस्थान के भवन के लिए जमीन तो चिह्नित कर ली गई है लेकिन बजट न मिलने से निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। ऐसे में अभी जल्द भवन बनने के आसार नहीं हैं। इस पॉलीटेक्निक में इलेक्ट्रिकल और मेकेनिकल दो ट्रेड संचालित हैं। इलेक्ट्रिकल ट्रेड में 41 और मेकेनिकल ट्रेड में 55 प्रशिक्षणार्थी अध्ययनरत है।
आजकल पॉलीटेक्निक की काउंसलिंग चल रही है। इसमें छात्र संख्या बढ़ सकती है। इस संस्थान में तकनीकी शिक्षा लेने के लिए काउंसलिंग के जरिये बाहरी स्थानों के छात्र-छात्राएं भी आते हैं लेकिन छात्रावास की सुविधा न होने के कारण छात्र-छात्राएं बाजार में किराये के कमरों में रहने को मजबूर हैं। संस्थान में पढ़ने वाले कुछ छात्र बेहद गरीब परिवारों से आते हैं। ऐसे में उनके लिए बाजार में महंगा कमरा लेना मुश्किल होता है। बाजार में कमरों का किराया अधिक होने से उन्हें आर्थिक चपत लगती है। संस्थान के प्रधानाचार्य सुमित कुमार सिंह ने बताया कि संस्थान के भवन निर्माण के लिए जमीन चिह्नित है लेकिन बजट के अभाव में निर्माण कार्य रुका है। उन्होंने बताया कि इसकी सूचना विभाग और उच्चाधिकारियों को भेजी जाती है।
खेलों के आयोजन में भी होती हैं दिक्कतें
अल्मोड़ा। शहीद मेजर कमलेश पांडे राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान बाड़ेछीना के पास खेल का मैदान भी नहीं है। संस्थान की वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन जीआईसी के खेल मैदान में ही किया जाता है। इससे कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई बार उसी दिन जीआईसी की भी खेल प्रतियोगिताएं होती है। ऐसे में खेल मैदान में खेलों के आयोजन में परेशानी झेलनी पड़ती है। संवाद