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नानीसार में लोग आंदोलित

Thu, 28 Jan 2016 12:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
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नानीसार में फहराते ही राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा उतार दिया गया। 26 जनवरी को गणतंत्र बचाओ, नानीसार बसाओ कार्यक्रम के लिए वयोवृद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देवेंद्र सनवाल के नेतृत्व में नानीसार झंडा फहराने पहुंचे आंदोलनकारियों को पहले सुरक्षा कर्मियों ने गेट के बाहर ही रोक लिया।
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आंदोलनकारियों और सुरक्षा कर्मियों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी नोक झोंक हुई। बाद में प्रशासन की मौजूदगी में जिंदल ग्रुप के बाउंसरों ने गेट पर लहराए जा रहे तिरंगे को उखाड़ा और अपने साथ ले गए। आंदोलनकारियों के गेट के बाहर सभा की और झूठे मुकदमे वापस लेने और नानीसार से अवैध कब्जा हटाने की मांग की।

26 जनवरी को नानीसार में नानीसार बचाओ संघर्ष समिति, उपपा, क्रांतिकारी जनवादी मोर्चा के आह्वान पर कुमाऊं और गढ़वाल से कई आंदोलनकारी ताकतें पहुंची थीं। द्वारसों से आंदोलनकारी जनगीत गाते हुए पैदल नानीसार की ओर कूच कर गए। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात की गई थी।
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 100 से अधिक महिलाओं और पुरुष आंदोलनकारी ढोल-नगाड़ों के साथ नारेबाजी करते हुए अंतर्राष्ट्रीय आवासीय विद्यालय के मुख्य गेट पर पहुंचे तो वहां मौजूद पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने बेरीकेडिंग कर दी।

आंदोलनकारी गेट के भीतर जाकर झंडा फहराने की जिद में अड़े थे, इस बीच पुलिस के साथ आंदोलनकारियों की धक्का-मुक्की और तीखी नोक-झोंक हुई। बाद में प्रशासन ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देवेंद्र सनवाल को अंदर आकर झंडा फहराने की इजाजत दी।

जैसे ही श्री सनवाल ने झंडा फहराया तो जिंदल ग्रुप के नकाबपोश बाउंसरों ने झंडा उखाड़ा और लपेटकर अपने साथ ले गए। प्रशासन के अधिकारी यह सब खामोश देखते रहे। झंडे का अपमान होता देख आंदोलनकारी आक्रोशित हो गए। वहां टकराव की नौबत आ गई थी, बड़ी मुश्किल से टकराव टला।

गेट के बाहर आंदोलनकारियों ने सभा की। इस दौरान शासन-प्रशासन के नुमाइंदों पर ग्रामीणों की बेशकीमती जमीन को हड़पने का आरोप लगाया। कहा कि यदि उपपा केंद्रीय अध्यक्ष पीसी तिवारी सहित तमाम आंदोलनकारियों से मुकदमे नहीं हटाए गए और नानीसार से जिंदल समूह का अवैध कब्जा नहीं हटा तो आंदोलनकारी ही कब्जा हटाएंगे।
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