अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) हवालबाग में हिंदी भाषा की विशेषताएं एवं कठिनाइयां विषय पर कार्यशाला हुई। मुख्य अतिथि एसएसजे परिसर की सेवानिवृत्त प्रो. दिवा भट्ट ने कहा कि हिंदी संस्कृत से निकली समृद्ध भाषा है जो विदेशों में भी देश का प्रतिनिधित्व करती है। इसे सहेजने के सभी को गंभीरता से प्रयास करने होंगे।
बृहस्पतिवार को हुई कार्यशाला में संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. जगदीश चंद्र भट्ट ने कहा कि वैज्ञानिकों ने भी हिंदी की वर्णमाला में हर एक अक्षर का स्थान निर्धारित किया है। लिपि भाषा को आकृतियों के माध्यम से दर्शाती है। उन्होंने हिंदी की पांच उपभाषाओं की जानकारी भी दी। कहा कि जितनी शुद्धता से हिंदी बोली जाएगी, इसे उतना ही शुद्ध लिखा जाएगा। इस दौरान संस्थान के फसल सुरक्षा प्रभागाध्यक्ष डाॅ. कृष्ण कांत मिश्रा, फसल उत्पादन प्रभागाध्यक्ष डाॅ. बृज मोहन पांडे, मुख्य तकनीकी अधिकारी और राजभाषा अधिकारी रेनू सनवाल आदि मौजूद रहे। संवाद