कोसी नदी में जमा सिल्ट और मलबा।
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पिछले दिनों हुई बारिश से कोसी नदी में काफी मात्रा में सिल्ट और गंदगी बहकर आ गई है और पेयजल पंपों के समीप एकत्र हो गई है। जिससे शहर और आसपास के क्षेत्रों को मटमैले पानी की आपूर्ति हो रही है। सिल्ट और मलबे की सफाई के लिए बृहस्पतिवार सायं से कोसी बैराज के गेट खोलकर पानी छोड़ना शुरू कर दिया गया है। बैराज को खाली होने पर 12 से 14 घंटे लगे। जिसके चलते शुक्रवार को शहर की पानी की आपूर्ति आंशिक रूप से प्रभावित होने की आशंका है।
जल संस्थान शहर और आसपास के क्षेत्रों को पानी की आपूर्ति करता है पिछले दिनों बारिश होने पर ऊपरी क्षेत्रों से काफी मात्रा में कोसी नदी में सिल्ट, मलबा और गंदगी बहकर आ गई है। जिससे शहर को भी मटमैले पानी की आपूर्ति हो रही है इससे शहर की जनता में आक्रोश व्याप्त है। कोसी नदी में जमा मलबे, कूड़े, करकट और गंदगी की सफाई के लिए सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार सायं 3:30 बजे से बैराज के गेट खोलकर पानी छोडना शुरू कर दिया है। बैराज को खाली होने में करीब 12 से 14 घंटे का समय लगेगा। बैराज से पानी की निकासी की गई और सिल्ट, लकड़ी और अन्य मलबे की सफाई की गई।
विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने पेयजल और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ कोसी नदी और बैराज का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि लोगों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति करने का विशेष ध्यान रखा जाए। सरयू-सेराघाट पंपिंग योजना की स्वीकृति के लिए राज्य सरकार और शासन से वार्ता की जाएगी। बाद में उन्होंने मटेला स्थित पेयजल टैंक का भी निरीक्षण किया। इस मौके डीसीबी अध्यक्ष ललित लटवाल, एसई जल संस्थान केएस खाती, पेयजल निगम निर्माण शाखा के ईई केडी भट्ट, एई प्रमोद पाठक, मंजुल मेहता, मुकेश कुमार, हरीश कनवाल, महिपाल बिष्ट, सुरेश भट्ट आदि भी मौजूद थे।
आज रहेगी पेयजल आपूर्ति आंशिक प्रभावित
अल्मोड़ा। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता केएस खाती ने बताया कि शुक्रवार को शहर की पेयजल आपूर्ति आंशिक रूप से प्रभावित रहेगी। उन्होंने लोगों से पानी का संचय कर लेने को कहा है। इधर जल संस्थान ने बृहस्पतिवार को जैंती, भनोली, रौनडाल और चितई क्षेत्र में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की।